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फजीहत के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने लिया धान उठाव के नियम में बदलाव का निर्णय

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रायपुर, द प्राइम न्यूज नेटवर्क। आने वाले धान खरीदी सीजन में छत्तीसगढ़ सरकार,किसानों से खरीदे गए धान के उठाव के नियम में बड़ा बदलाव करने जा रही है। मंगलवार को खाद्य मंत्री अमरजीत भगत की अध्यक्षता में हुई सम्पन्न हुए मंत्रिमण्डलीय उप समिति की बैठक यह अहम निर्णय लिया गया है। इस बैठक में अमरजीत भगत के साथ कृषि और जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे,सहकारिता मंत्री डा प्रेम साय टेकाम और उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल भी शामिल थे। बैठक में विपडन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर किसानों से खरीदे गए 92 लाख मीट्रिक टन धान के निबटान और कस्टम मिलिंग पर चर्चा हुई। बैठक में सबसे अहम निर्णय,आने वाली धान खरीदी सीजन से किसानों से खरीदे गए धान के उठाव समय मे परिवर्तन करने के सम्बंध में लिया गया है। यह समय अभी 72 घण्टे का है। अर्थात धान खरीदी होने के 72 घण्टे के अंदर मिलर को डीओ जारी कर,इसे सहकारी समिति की मंडी से उठा लिया जाना चाहिए। लेकिन हाल के वर्षों में इस नियम के पालन में व्यवहारिक अड़चन देखने को मिला है। वर्ष 2020-21 में बारदाना की कमी सहित कई कारणों से समितियो में धान के जाम होने से,खरीदी प्रक्रिया प्रभावित हुई थी। धान के उठाव में लेट लतीफी से सुखत की समस्या भी सामने आती है। हाल ही में सहकारी समिति के कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी थी। उनकी मांग थी कि सुखत के लिए समिति नहीं,अपितु मिलर और शासन-प्रशासन जिम्मेदार होता है। इसलिए,सुखत की जो राशि उनसे वसूल किया गया,उसे वापस,समिति के खाते में डाला जाए। जाहिर है,सरकार,उठाव के लिए 72 घण्टे के समय मे बदलाव करती है तो उस पर सुखत की निर्धारित मात्रा में भी परिवर्तन करने का दबाव बढ़ सकता है। बहरहाल,धान की गरमाती हुई सियासत के बीच,सरकार की नई धान खरीदी नीति पर् सबकी नजरें टिकी हुई हैं। सरकार की यह नीति,प्रदेश के भावी सियासत के साथ किसानों के भविष्य को भी प्रभावित करेगा।

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