जशपुर नगर, द प्राइम न्यूज नेटवर्क। ये जशपुर का जिला चिकित्सालय है जनाब। यहां मरीजों की सेवा नही,उन्हें अवकाश के दिन घर मे बैठने और डॉक्टरों को परेशान ना करने की मशविरा दी जाती है। आप बीमार हैं तो क्या हुआ,आज तो शासकीय अवकाश है,हम मरीज का इलाज भला क्यों करें? हमे इसका अलग से वेतन तो मिलेगा नही? अब आप डॉक्टरों की ड्यूटी और मानवता का पाठ मत पढ़ाने लगिए। ये तो हम अच्छी तरह से जानते है। अवकाश का दिन है थोड़ा आराम कर लेते हैं,बच्चे को बुखार है तो क्या,एक दिन इंतजार कर लीजिए। कल अस्पताल खुलेगा तो ओपीडी टाइम में आ जाएगा,हो जाएगा इलाज। अरे,सरकार तो बोलती रहती है,सर्दी,खासी,बुखार हो तो तत्काल जांच कराएं। अब कोरोना कहां है?…..वो तो गया। अब आप भी चले जाइए,हमारा छुट्टी खराब मत कीजिए। भाई डॉक्टर भी तो इंसान हैं,उन्हें भी ड्यूटी के समय आराम करने का अधिकार है???? और फिर ये तो जशपुर का जिला चिकित्सालय है,इसे सुधारने का दावा करने वाले कितने अधिकारी और जनप्रतिनिधि,इतिहास के पन्ने में सिमट गए है,लेकिन जिला अस्पताल सुधरा क्या?? अब आप शोले फ़िल्म के जेलर साहब का डायलाग याद मत कीजियेगा….जब हम नहीं सुधरे तो……? चलिए अस्पताल नहीं सुधरता है तो आप सुधर जाइए। और ये बीमारी को अच्छी तरह से समझा दीजिए,छुट्टी के दिन तो आया ही न करे,अन्यथा हम डॉक्टरों को कुछ तो सोचना ही होगा?




