जशपुर,छत्तीसगढ़ में शिक्षा की गुणवत्ता सुधार को लेकर मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान के अंतर्गत जशपुर जिले में ऐतिहासिक प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। यह प्रशिक्षण दो चरणों में आयोजित हुआ—पहला 18 अगस्त को जिला स्तरीय और दूसरा 20 अगस्त को संकुल स्तरीय। इन दोनों दिनों ने शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी और जिले को राज्य स्तर पर एक आदर्श मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया।
18 अगस्त का दिन जशपुर के शिक्षा इतिहास में विशेष महत्व का रहा। इस दिन जिले के कुल 149 संकुल प्राचार्यों का व्यापक प्रशिक्षण संकल्प शिक्षण संस्थान, जशपुर में सम्पन्न हुआ। इस प्रशिक्षण का संचालन डाइट जशपुर की टीम ने किया और इसे सफल बनाने में पूरे जिले की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम में संकल्प शिक्षण संस्थान, जशपुर के प्राचार्य श्री विनोद गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा गुणवत्ता सुधार केवल शासन या विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं है, यह हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि संकुल स्तर पर सामाजिक अंकेक्षण को सही ढंग से लागू किया गया तो शिक्षा व्यवस्था में निश्चित रूप से सकारात्मक बदलाव आएगा।
प्रशिक्षण की रूपरेखा डाइट जशपुर के प्राचार्य डॉ. एम. जे. यू. सिद्दीकी ने प्रस्तुत की। उप-प्राचार्या श्रीमती सरोज संगीता भोय ने विस्तृत कार्ययोजना पर प्रकाश डाला, वहीं श्री आर. बी. चौहान, व्याख्याता संकल्प संस्थान ने प्राचार्यों को प्रशिक्षण सामग्री की विशेषताओं से अवगत कराया। हालांकि डाइट जशपुर के कुछ वरिष्ठ व्याख्याताओं की अनुपस्थिति दर्ज की गई, लेकिन इसके बावजूद कार्यक्रम अपने उद्देश्य में पूर्णतः सफल रहा।
इस प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु रहा सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit)। प्राचार्यों को यह निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने संकुलों में नोडल अधिकारी नियुक्त करें और इस आधार पर 20 अगस्त को शिक्षकों को प्रशिक्षित करें। सामाजिक अंकेक्षण से न केवल विद्यालयों की वास्तविक स्थिति उजागर होगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित होगा कि अभिभावक और समुदाय शिक्षा सुधार की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएँ।
प्रशिक्षण के दौरान प्राथमिक, मिडिल और हाई/हायर सेकेंडरी स्तर पर 20-20 प्रश्नों का विस्तार से विश्लेषण किया गया। प्राथमिक स्तर पर श्री मुकेश कुमार, सहायक शिक्षक शासकीय प्राथमिक शाला दासडूमरटोली और श्री अजय कुमार वर्मा, सहायक शिक्षक शासकीय प्राथमिक शाला सुकबासूपारा, कुनकुरी ने बच्चों की आधारभूत साक्षरता, गणनाक्षमता और सहभागिता पर चर्चा की। मिडिल स्तर पर श्री अरुण चंद्रा, शिक्षक शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला जामपानी और श्री सोमेश्वर कोसले, शिक्षक शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सुकबासूपारा, कुनकुरी ने गणित व विज्ञान की समझ और बच्चों की उपस्थिति सुधारने की रणनीतियों पर मार्गदर्शन दिया। वहीं हाई/हायर सेकेंडरी स्तर पर श्री आशुतोष शर्मा, व्याख्याता पीएम श्री विद्यालय, सेजेस मनोरा और श्री अनूप कुमार साहू, व्याख्याता शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, लोदाम ने बोर्ड परीक्षा की तैयारी, उच्च शिक्षा और कैरियर मार्गदर्शन पर प्रकाश डाला।
जिले के सभी 149 संकुल प्राचार्यों ने गहनता से प्रशिक्षण प्राप्त किया। एक प्राचार्य ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह पहली बार है जब हमें इतने व्यवस्थित ढंग से 20 प्रश्नों पर आधारित प्रशिक्षण मिला। अब हम अपने संकुल में जाकर इसे शिक्षकों तक पहुँचाएँगे और शिक्षा सुधार की दिशा में ठोस शुरुआत करेंगे।
20 अगस्त को जिले के सभी 149 संकुल प्राचार्यों ने अपने-अपने संकुल में प्रशिक्षण आयोजित किया। यह दिन वास्तव में ऐतिहासिक रहा क्योंकि हर संकुल में एक साथ प्रशिक्षण हुआ, तीनों स्तरों पर 20-20 प्रश्नों पर चर्चा की गई और शिक्षकों को सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया से अवगत कराया गया। इस दिन सभी प्राचार्यों ने 18 अगस्त को प्राप्त प्रशिक्षण को आधार बनाकर अपने संकुल के नोडल शिक्षकों को प्रशिक्षित किया।
संकुल स्तर पर हुए प्रशिक्षण की विशेषताएँ उल्लेखनीय रहीं। सभी संकुलों में एक ही प्रारूप पर प्रशिक्षण आयोजित हुआ, शिक्षक और प्राचार्य दोनों ने उत्साहपूर्वक सक्रिय भागीदारी की, प्रश्नों के माध्यम से व्यावहारिक स्थितियों का समाधान खोजा गया और शिक्षकों को समाज से जुड़ने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
दोनों चरणों के अंत में प्राचार्यों और शिक्षकों ने यह संकल्प लिया कि वे शिक्षा गुणवत्ता सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे। सभी ने निश्चय किया कि सामाजिक अंकेक्षण को अपनाकर विद्यालयों की गुणवत्ता को शत-प्रतिशत सुनिश्चित करेंगे। अंत में कुछ प्राचार्यों द्वारा पूरे प्रशिक्षण का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया और कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि वे निश्चित रूप से सामाजिक अंकेक्षण के इस पावन कार्य को अपनाकर शिक्षा की गुणवत्ता सुधार में अपना योगदान देंगे।
इस प्रकार जशपुर जिला मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान का आदर्श उदाहरण बनकर सामने आया है। 18 अगस्त को जिला स्तरीय प्रशिक्षण ने संकुल प्राचार्यों को तैयार किया और 20 अगस्त को संकुल स्तरीय प्रशिक्षण ने शिक्षकों तक यह संदेश पहुँचाया। यह शिक्षा सुधार की वह लहर है जो अब जिले के हर विद्यालय तक पहुँचेगी और हजारों बच्चों के भविष्य को संवारने का कार्य करेगी।




