जशपुर। सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो और नायब तहसीलदार से जुड़े बहुचर्चित विवाद को लेकर जिले की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। मामले में अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं होने से राजस्व कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है। इसी कड़ी में मंगलवार को राजस्व पटवारी संघ जशपुर ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर दोषियों के विरुद्ध शीघ्र एवं कठोर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि न्यायोचित कार्रवाई नहीं की गई तो संघ किसी भी समय आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगा।
राजस्व पटवारी संघ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि संघ इस पूरे घटनाक्रम की घोर निंदा करता है। संघ का मानना है कि यह मामला केवल एक राजस्व अधिकारी के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासकीय कर्मचारियों की गरिमा, सम्मान और प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा आघात है। संघ ने कहा कि यदि ऐसे मामलों में समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की जाती है तो इससे शासकीय कर्मचारियों के बीच असुरक्षा और भय का वातावरण निर्मित होगा, जिसका असर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी पड़ेगा।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस घटना के बाद राजस्व विभाग के कर्मचारियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। कर्मचारियों का कहना है कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए और यदि किसी भी कर्मचारी के साथ अभद्रता या हिंसक व्यवहार किया जाता है तो दोषियों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
पटवारी संघ ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ़ एवं कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ की सभी मांगों का पूर्ण समर्थन करता है। संघ ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन किसी भी समय बिना पूर्व सूचना के आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा। ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला पटवारी संघ जशपुर के अध्यक्ष विनय श्रीवास्तव, संरक्षक अशोक मांझी, संगठन मंत्री भगवती चरण टंडन, चंद्रशेखर पटेल, यशवंत स्वर्णकार सहित बड़ी संख्या में पटवारी और राजस्व कर्मचारी उपस्थित रहे। कर्मचारियों की बढ़ती नाराजगी को देखते हुए अब यह मामला केवल प्रशासनिक विवाद नहीं रह गया है, बल्कि कर्मचारी संगठनों के आंदोलन की चेतावनी के बाद यह एक बड़े कर्मचारी आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।




