प्रगतिशील किसान संजीता एक्का बनीं प्रेरणा, विविध कृषि गतिविधियों से बढ़ाया मुनाफा

Picture of News Desk

News Desk

SHARE:

जशपुरनगर, 26 अक्टूबर 2026/ जशपुर जिले के ग्राम सोगड़ा निवासी प्रगतिशील किसान संजीता एक्का ने पारंपरिक धान की खेती से आगे बढ़कर मत्स्य पालन, बत्तख पालन और सुकर पालन को अपनाकर आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल कायम की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने न केवल अपनी आय में वृद्धि की है, बल्कि अन्य किसानों को भी विविध कृषि गतिविधियों और नवाचार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

समाचार फोटो

संजीता एक्का अपने पति ईश्वर राम एक्का के साथ मिलकर खेती-किसानी और विभिन्न आजीविका गतिविधियों का संचालन करती हैं। पहले उनका परिवार मुख्य रूप से खरीफ सीजन में धान की खेती पर निर्भर था, जिससे उन्हें सीमित आमदनी होती थी। इस स्थिति को देखते हुए, उन्होंने खेती के अन्य विकल्पों को तलाशने और अपनाने का निर्णय लिया।

अपने इस निर्णय के तहत, संजीता ने सबसे पहले मत्स्य पालन शुरू किया, जिससे उन्हें धान की खेती की तुलना में बेहतर लाभ मिलने लगा। मत्स्य पालन की सफलता के बाद, उन्होंने धीरे-धीरे बत्तख पालन और सुकर पालन को भी अपनी आजीविका से जोड़ा, जिससे उनकी आय के नए और स्थायी स्रोत विकसित हुए।

समाचार फोटो

आय के स्रोतों में विविधता लाने के साथ-साथ, संजीता अब मौसम के अनुसार फसल विविधीकरण पर भी विशेष ध्यान दे रही हैं। बरसात के मौसम में धान की खेती करने के बाद, वे गर्मी के मौसम में आलू और गेहूं की खेती करती हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने अपने खेत में लीची के पौधे लगाकर बागवानी की भी शुरुआत की है। उनका मानना है कि खेती में विविधता लाने से उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग होता है और लीची के पौधे खेत की मिट्टी के कटाव को रोकने में भी सहायक सिद्ध होते हैं।

अपनी खेती और आजीविका को सुरक्षित बनाने के लिए, संजीता ने अपने खेत के पास सोलर फेंसिंग भी लगवाई है। शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर वे मत्स्य पालन, बत्तख पालन और सुकर पालन जैसी गतिविधियों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रही हैं। इन प्रयासों से उनके परिवार को आय के अतिरिक्त अवसर मिल रहे हैं और खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिल रही है।

समाचार फोटो

संजीता एक्का ने अपनी इस प्रगति के लिए जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। वे अन्य किसानों को भी पारंपरिक धान की खेती के साथ-साथ अन्य फसलों, बागवानी और सहायक आजीविका गतिविधियों को अपनाने के लिए सक्रिय रूप से प्रेरित कर रही हैं, ताकि वे भी आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ सकें।

संजीता एक्का की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता और आजीविका संवर्धन की दिशा में एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करती है। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि नई सोच, फसल विविधीकरण और कृषि आधारित सहायक गतिविधियों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

समाचार फोटो

समाचार फोटो

समाचार फोटो

News Desk
Author: News Desk

Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement Carousel
Advertisements
और पढ़ें
error: Content is protected !!