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3.41 करोड़ की लागत से 51 साल बाद बना झिकी नाला कालिबा का गणेश पुल, संसदीय सचिव यू. डी. मिंज ने किया लोकार्पण

 

57 गांव के लोग के लिए वरदान साबित होगा, कुनकुरी-बगीचा की दुरी होगी कम, नाच गाकर ग्रामीणों ने जताई खुशी

 

कालिबा के स्व. गणेश अम्बस्थ के सपनों का झिकी नाला पुल, उनके आशीर्वाद से 51 साल बाद बनकर हुआ तैयार :यू. डी. मिंज

 

 

 

जशपुर: विकास के पर्याय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की स्वीकृति उपरांत कलिबा वासियों की 51 साल पुरानी पुल की माँग अंततः पूरी हो ही गईं संसदीय सचिव यू. डी. मिंज के प्रयास से सीएम ने 3.41 करोड़ का पुल स्वीकृत किया जो कि उस क्षेत्र के 57 गाँव के लोगों के लिए अब वरदान साबित होगा. श्री मिंज ने इसका लोकार्पण किया तो गाँव के लोगों ने नाच गाकर इसकी ख़ुशी मनाई.

 

विदित हो कि झिकी नाला पुल कुनकुरी को बगीचा से जोड़ने वाले महत्त्वपूर्ण सड़क है. बरसात के 6 महीने उधर के गाँव के लोग बहुत परेशानी में रहते थे। आवागमन के लिए नाव चलती थी।लुईस बेक विधायक थे तब से इस नाले पर पुल बनाने की मांग शुरू हुई। कलिबा गांव के पुराने लोग बताते हैं कि झीकी नाला अम्बष्ट परिवार की निजी जमीन से होकर बहता है और किसी भी नेता ने जमीन के मालिकों से बिना सहमति लिए पुल बनाने की बात कहते रहे।जब नेताओं के प्रयास विफल गए तब भाजपा सरकार में स्व. युध्दवीर सिंह जूदेव की पहल पर 2005 में हर्राडाँड़ में विकल्प के तौर पर पुल बनाया गया।इसके बावजूद भी अधिकतर लोग पानी कम होते ही पुराने रास्ते से आना-जाना करते रहे क्योंकि लोगों को 5 किलोमीटर लम्बा रास्ता तय करना पड़ता था।

 

संसदीय सचिव यू. डी. मिंज ने कहा कि वर्षों से लंबित झिकी नाला पुल आज स्व. गणेश अम्बस्थ जी के कारण बन कर पूरा हुआ है उन्होंने मुझसे कहा था कि तुम विधायक बनकर इस पुल का निर्माण कराना.उन्होंने यह बात अपनी डायरी में लिखा था उनके मृत्यु उपरांत आज उनके आशीर्वाद स्वरूप आज झिकी नाला का पुल का निर्माण हुआ है. उनकी कही बात सच निकली.

 

कालिबा के स्व गणेश अम्बष्ट के पुत्र राजेश अम्बस्थ ने बताया कि झिकी नाला पुल को बनवाने के लिए लुईस बेक अजीत जोगी, रमन सिंह विष्णुदेव साय, दिलीप सिंह जूदेव, युद्धवीर सिंह जूदेव, गणेश राम भगत, जैसे तमाम जनप्रतिनिथि लगे लेकिन नज़दीक में भूमि स्वामी से बिना सलाह/सहमति लिये कार्य करना चाहते थे। विधायक यू.डी. मिंज की मेरे पिता स्व. गणेश प्रसाद अम्बस्थ से मित्रता थी इस वजह से उनकी गहन चर्चा होते रहती थी पिताजी ने कहा था कि यू. डी. मिंज विधायक बनेगा तो ये पुल बनेगा आज विधायक बनने के बाद सही में यह पुल बनकर तैयार हुआ है यह पुल दोनों की मित्रता की मिसाल बन गया. उन्होंने बताया कि इसको लेकर कुनकुरी के तमाम जनप्रितिनिधि संघर्ष मोर्चा बना कर प्रयास किये लेकिन भी समस्या का हल नहीं निकला जिसे यू डी मिंज जो की ख़ुद एक इंजीनियर भी हैं, अथक प्रयास कर बहुचर्चित झिकी नाला पुल का कार्य पूर्ण करवाए। कहा जाता है जहां चाह है वहीं राह है ।आज लोगो को विश्वास नहीं हो पा रहा है जिस सपने को सन् 72 से लोग देखने लगे थे वह सपना आज वर्ष2023 में पूर्ण हुआ.

 

*कौन थे गणेश अम्बष्ट?*

गणेश अम्बष्ट कलीबा के प्रतिष्ठित जमीदार परिवार में जन्मे।बचपन से ही अपने भाइयों के साथ पढ़ने-लिखने में गहन रुचि लेते थे।उन्होंने उच्च शिक्षा ग्रहण की और शिक्षक बनकर निरक्षर समाज को साक्षर बनाने का काम किया।कलिबा हाईस्कूल खोलने का श्रेय भी स्व. गणेश अम्बष्ट को जाता है जिन्होंने गरीब,आदिवासी बच्चों की 8 वीं के बाद शाला छोड़ने की बढ़ती संख्या को देखकर हाईस्कूल खोलने का प्रयास किया और वे सफल रहे।गणेश अम्बष्ट के दो बेटे है।राजेश अम्बष्ट,राजीव अम्बष्ट ये दोनों भी शिक्षक हैं।यहां यह भी बताते चलें कि गणेश अम्बष्ट और उनके बड़े भाई रमेश अम्बष्ट के अभिन्न मित्र जोकारी जमीदार परिवार से प्रबल मिंज थे।जो कुनकुरी विकासखण्ड के जनपद अध्यक्ष भी रहे।संयोग देखिये कि प्रबल मिंज के भतीजे यूडी मिंज हैं और यही संयोग इस पुल को आकार देने में काम आया।राजेश अम्बष्ट याद करते हैं कि 2016 में पिताजी अपने फार्म हाउस में यूडी मिंज को बोले कि तुम विधायक बनोगे तब झीकी नाला में तुम पुल बना लेना,मैं जमीन दे दूंगा।आज कलिबा समेत 57 गांव के लोग इस पुल को गणेश पुल के नाम से पुकारने लगे हैं।गणेश अम्बष्ट 16 मई 2018 इस दुनिया में नहीं रहे लेकिन उनके द्वारा लोगों के कल्याण के लिए दी गई जमीन पर बना बड़ा पुल निश्चित ही लोगों के दिलों में उन्हें जिंदा रखेगा।

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