
कोरबा जिला वन्य जीवों से सजा हुआ है यहां विभिन्न प्रजाति के जीव जंतुओं का बसेरा है गाहे बगाहे यहां विभिन्न प्रजाति के जीव जंतु दिख जाते है । बीती रात जिले के झोरा नामक ग्राम जो की कोरबा शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर है,से लगे ग्राम सिरकी मे एक अलग ही घटना सामने आई। ग्राम निवासी कैलाश जिनका घर नदी और पहाड़ों के बीच में बसा हुआ है,उनके घर के पास ही एक सुंदर एवं अद्भुत प्रजाति का एक हरा सांप देखा गया। ग्राम निवासी कैलाश ने देर ना करते हुए इसकी जानकारी आरसीआरएस संस्था के सदस्य शेष बन गोस्वामी को दी गई ,जो को छुरी मे रहते है। छुरी मे भी उपस्थित ना होने के वजह से गोस्वामी के द्वारा इसकी जानकारी अपने संस्था के एनटीपीसी रेस्क्यू टीम के सदस्य रघुराज सिंह को दी गई । रघुराज सिंह के द्वारा देरी न करते हुए अपने टीम के सदस्य विक्की सोनी,शंकर राव,सागर साहू,महेश्वर,लोकेश,मोनू ,आयुष, कृष्णा,ऋतुराज, प्रिया मंडल,अंजलिरेडी के साथ ग्राम सिरकी के लिए निकल पड़े।
मौके पर पहुंचे सदस्यों के द्वारा देखा गया की वह एक ग्रीन कीलबैक सांप है। सदस्यों के द्वारा बड़े ही सुरक्षा और सावधानी के साथ सांप को रेस्क्यू कर लिया गया। रेस्क्यू के बाद वनविभाग कटघोरा मंडल रेंजर ऑफिसर सुखदेव सिंह मरकाम एवं चौकीदार विदेशी यादव , छुरी आरसीआरएस टीम और एनटीपीसी आरसीआरएस टीम के उपस्थिति मे पंचनामा तैयार कर सांप को सुरक्षित पर्यावरण में रिलीज कर दिया गया। जाने इस दुर्लभ प्रजाति के सांप के बारे में ग्रीन कीलबैक सांप का वैज्ञानिक नाम रैब्डोफिस प्लंबिकलर है। मुख्य रूप से मेंढक इनका प्रमुख भोजन होता है। ये ग्रीन कीलबैक अपनी गर्दन को जमीन से ऊपर उठाकर इसे नाग की तरह फैला सकता है।पलक झपकते ही छिप जाता है,सर्प विशेषज्ञों के मुताबिक यह सांप हरी घास, झाड़ियों में रहता है और बेहद ही फुर्तीला होता है। पलक झपकते ही गायब हो जाता है। मेंढक, चूहे को खाने वाला यह सांप शाम होते ही सक्रिय हो जाता है। इसकी आंख बड़ी होती है। बेंगलुरू में हुए एक अध्ययन के मुताबिक यह सांप 8-15 अंडे तक देता है और सितंबर से अक्टूबर माह इसके अंडे देने का समय होता है
