
जशपुरनगर: जशपुर जिले के कुनकुरी ब्लॉक के मयाली में आयोजित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा का तीसरा दिन ऐतिहासिक बन गया, जब राजपरिवार के सदस्य विजय आदित्य सिंह जूदेव ने अपनी सादगी की मिसाल पेश करते हुए विशेष संरक्षित जनजाति पहाड़ी कोरवाओं के साथ जमीन पर बैठकर कथा का श्रवण किया।
कथा वाचन कर रहे प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने इस दौरान जीवन में करुणा और दया के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि जैसे वर्षा में छाता संबल देता है, वैसे ही कठिन समय में भगवान शिव की भक्ति व्यक्ति को संघर्षों से उबरने की शक्ति प्रदान करती है। उन्होंने भगवान शिव के अमृत और विष सेवन से जुड़ी कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया कि सच्ची करुणा और निस्वार्थता ही अमरत्व का मार्ग है।
पहाड़ी कोरवाओं के बीच जमीन पर बैठे विजय आदित्य सिंह जूदेव
तीसरे दिन का यह आयोजन खास बन गया, जब राजपरिवार के सदस्य विजय आदित्य सिंह जूदेव ने अपने राजसी ठाठ-बाट छोड़कर पहाड़ी कोरवाओं संग जमीन पर बैठकर कथा सुनी। उनकी इस सादगी और श्रद्धा ने सभी का मन मोह लिया। पहाड़ी कोरवा समाज, जो प्राचीन आदिवासी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ा है, पहली बार इतने बड़े धार्मिक आयोजन में इस तरह शामिल हुआ।
पटिया से आए ग्राम पंचायत अलोरी पटिया के सरपंच रोहन राम ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि “हमने पहली बार इतनी दिव्य शिव कथा सुनी। इससे हमारे मन में भगवान शिव और सनातन धर्म के प्रति आस्था और मजबूत हुई है।” उनके साथ आए जतरू राम, खोरतो राम और सोहराई राम ने भी कहा कि जो ज्ञान उन्हें यहां मिला, उसे वे अपने गांव के लोगों तक जरूर पहुँचाएंगे।
भक्ति और समर्पण की मिसाल बनी कथा
इस आयोजन में हजारों श्रद्धालु उपस्थित थे, जिन्होंने कथा का आनंद लिया और भक्ति में लीन हो गए। कथा के अंत में पहाड़ी कोरवाओं को विशेष रूप से आरती में भी शामिल किया गया, जिससे उनमें आध्यात्मिक जुड़ाव और अधिक प्रबल हुआ।
विजय आदित्य सिंह जूदेव की इस सादगी और श्रद्धा ने यह संदेश दिया कि भक्ति में न कोई ऊँच होता है, न नीच – सब समान होते हैं। उनकी इस पहल ने न केवल पहाड़ी कोरवाओं को सनातन धर्म की गहराइयों से जोड़ा, बल्कि समाज में समानता, करुणा और भक्ति की एक नई मिसाल भी पेश की।
