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रिटायर्ड फूड आफिसर को चुना लगा,फरार हो गई दूसरी पत्नी,घर से नगदी,जेवर और कार गायब

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द प्राइम न्यूज नेटवर्क। वृद्धावस्था में अकेलेपन से निजात पाने के लिए जीवन संगिनी का साथ ढूढ़ना रिटायर्ड फूड आफिसर को महंगा पड़ गया। घर के तमाम जेवरात,नगदी और कार लेकर रफूचक्कर होने से पहले शातिर महिला ने मायके में बंधक जमीन को छुड़ा कर बेचने का झांसा देकर वयोवृद्ध अफसर से 14 लाख रुपए भी झटक लिए। मामला छत्तीसगढ़ के बिलासपुर सरकंडा थाना क्षेत्र की है। जानकारी के मुताबिक सरकंडा के आयुर्वेद अस्पताल के नजदीक रहने वाले रिटायर्ड फूड अफसर मुंशीलाल पास्टरिया की पत्नी कमलादेवी का वर्ष 2015 में निधन हो गया था। बेटे और बहू से मतभेद होने के कारण वे अकेले रहा करते थे। अकेलेपन से निजात पाने के उद्देश्य से पीड़ित अफसर ने दूसरे विवाह के लिए इश्तेहार जारी किया। इस दौरान उनकी मुलाकात राजीव नगर निवासी आशा शर्मा से हुई। पीड़ित के मुताबिक परिचय के दौरान आशा शर्मा ने अपना मूल निवास मध्यप्रदेश के सागर जिला बताया था। कुछ ही दिनों के बाद प्रार्थी मुंशीलाल ने आशा शर्मा से भोपाल में विवाह रचा लिया और उसे लेकर बिलासपुर आ गए। साथ रहने के दौरान आरोपित महिला ने पीड़ित को बताया कि मध्यप्रदेश के खजुराहो में उसकी पैतृक जमीन है,जो बंधक रखी हुई है। करोड़ो की जमीन का सौदा हो चुका है,लेकिन इसे बेचने के लिए बंधक से छुड़ाना जरूरी है। महिला की बातों में विश्वास कर मुंशीलाल ने उधार लेकर 14 लाख रुपए आशा शर्मा को दे दिए। रुपये हासिल करने के बाद जमीन बेचने के बहाने शातिर महिला कार से खजुराहो जाने के बहाने रफूचक्कर हो गई। उसके जाने के बाद पीड़ित ने महिला से सम्पर्क करने का प्रयास किया,लेकिन मोबाइल बंद आने लगा। सन्देह होने पर जब उन्होंने घर के समान की जांच की तो लाकर में रखे हुए जेवर और नगदी भी नदारद मिले। पीड़ित का कहना है कि उन्होंने मध्यप्रदेश के महिला के घर पर भी उसे खोजने का प्रयास किया लेकिन वह खाली मिला। पड़ोसियों ने बताया कि वहां भी शातिर महिला में मकान किराए पर ले रखा था। पुलिस से की गई शिकायत में पीड़ित मुंशीलाल ने बताया है कि आशा शर्मा के साथ दो युवक भी रहा करते थे,जिन्हें वह अपना रिश्तेदार होने का दावा करती थी। आशा के साथ,दोनों युवक भी गायब हैं।
दो साल बाद जुर्म हुआ दर्ज-
अपने साथ हुए इस धोखाधड़ी की शिकायत वृद्ध रिटायर्ड अफसर ने 2019 में ही कि थी। लेकिन जांच के नाम पर पुलिस इसे लंबे अरसे तक लटकाए रखी। अब अपराध दर्ज करने के बाद पुलिस के सामने शातिरो तक पहुचने की चुनौती है,अन्यथा एफआईआर महज कागजी खानापूर्ति बन कर रह जाएगी

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