
जशपुर नगर द प्राइम न्यूज नेटवर्क। आपने मोबाइल में विभिन्न बातों के जरिए आम लोगों से ठगी करने की घटनाएं तो खूब सुनी और पढ़ी होगी। लेकिन जब ठग के बिछाए जाल में पूरा बैंक ही फंस जाए तो इसे आप क्या कहेंगे? मामला छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सिविल लाइंस थाना का है। यहां आईडीबीआई बैंक के शाखा प्रबंधक रवि शेखर सिंह ने पुलिस से की गई शिकायत में बताया है कि उनके बैंक में बैद स्टील प्राइवेट लिमिटेड का चालू खाता संचालित है। इसे सुश्री मंजू बैद,सोनल बैद,संयम बैद,श्रेयांश बैद संचालित करते हैं। 2 जुलाई को बैंक प्रबंधक के मोबाइल पर एक काल आया। कॉलर ने स्वयं को संयम बैद बताते हुए मेडिकल इमरजेंसी का हवाला देते हुए 23 लाख 31 हजार 955 रुपए तीन अलग अलग खातों में आरटीजीएस के माध्यम से डालने का अनुरोध किया। इसके लिए संयम बैद के ओर से अनुरोध पत्र के स्कैन किए हुए कॉपी भी बैंक को मेल किया गया। अनुरोध को स्वीकार करते हुए बैंक ने अनुरोध पत्र में बताए गए बैंक खाते शिवानी सागर के खाते में 8 लाख 85 हजार 668,खेम करण के खाते में 9 लाख 52 हजार 689 के रुपए और अमेश महतो के खाते में 4 लाख 93 हजार 628 रुपए बैंक ने ट्रांसफर किए। इस मामले में नया मोड़ उस वक्त आया बैद स्टील के निदेशक संयम बैद ने बैंक प्रबंधन को काल करके सूचना दी कि उनकी ओर से इस ट्रांजेक्शन के लिए कोई अनुरोध नहीं किया गया है। निदेशक बैंक शाखा में उपस्थित हुए। उनके सामने बैंक प्रबंधक ने उस मोबाइल नम्बर पर काल किया,जिससे, 23 लाख रुपए आरटीजीएस करने का अनुरोध किया गया था। इस पर काल रिसीव करने वाले ने फिर स्वयं को संयम बैद बताया। जब बैंक मैनेजर ने संयम बैद के सामने बैठे होने की बात कही तो,शातिर ठग ने बहाने बनाते हुए काल डिस्कनेक्ट कर दिया। बैंक प्रबंधक की रिपोर्ट पर सिविल लाइन पुलिस ने अज्ञात मोबाइल धारक के विरुद्ध धारा 420 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है।
