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विधानसभा विशेष सत्र : हंगामे के साथ शुरू हुई सदन की कार्यवाही, अजय चंद्राकर ने उठाया व्यवस्था का प्रश्न, आरक्षण पर 8 के बाद चर्चा कराने की मांग।

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छत्तीसगढ़ विधानसभा विशेष सत्र का आज दूसरा दिन सदन की कार्यवाही जोरदार हंगामे के साथ शुरू हुई। सदन में भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने विधानसभा के विशेष सत्र का प्रश्न उठाया। विशेष सत्र और शासकीय संकल्प के मसले पर सवाल खड़े किए।अजय चंद्राकर ने कहा- सत्र की अधिसूचना से पहले ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और विधायक मोहन मरकाम को कैसे जानकारी थी। अजय चंद्राकर ने मोहन मरकाम के खिलाफ विषेशाधिकार हनन की सूचना दी। सदन की कार्यवाही अजय चंद्राकर ने कहा, पीसीसी चीफ़ और मुख्यमंत्री को यह कैसे पता चल गया कि सत्र 1 और 2 दिसंबर को आहूत किया जाएगा। हम विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। इस पर चर्चा कराई जाए। कौन सा विधेयक है, जिसे अब तक वितरित नहीं किया गया है। सदन का राजनीतिक दुरुपयोग किया जा रहा है। चंद्राकर ने कहा कि विधानसभा में जितने सत्र हुए हैं। वह विषय केंद्रीय हुआ है। यदि आरक्षण के लिए विशेष सत्र बुलाया जा रहा है तो फिर अनुपूरक बजट कैसे लाया जा रहा है।

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संसदीय कार्यमंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में सत्र के विषय तय किए गए। हमने आरक्षण के विषय पर ही विशेष सत्र आहुत कराया है। पूरे प्रदेश के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है। क्या आप इसका विरोध कर रहे हैं?

स्पीकर डॉक्टर चरणदास महंत ने कहा कि सदन में जो भी बिज़नेस आया है, यह कार्यमंत्रणा समिति की तरफ़ से ही आया है। बीजेपी विधायक ननकी राम कंवर ने कहा कि आरक्षण के मामले में सरकार ने कोर्ट में ठीक ढंग से जवाब नहीं दिया।

इस पर मंत्री शिव डहरिया ने कहा कि बीजेपी की सरकार ने जो ग़लत किया है, आज उसे ही ठीक किया जा रहा है।

बीजेपी विधायक शिव रतन शर्मा ने कहा कि विधानसभा का अपमान है कि सत्र की अधिसूचना जारी होने के पहले पीसीसी चीफ़ मोहन मरकाम को सत्र की जानकारी कैसे मिली? यह विधानसभा की गरिमा का अपमान है।

नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कहा कि कार्य संचालन की पुस्तक में ये कहां लिखा है कि विशेष सत्र बुलाया जा सकता है।

ये गंभीर विषय है कि जब किसी को यह नहीं पता कि सत्र कबसे शुरू होगा। क्या सरकार ने चुनाव आयोग से अनुमति मांगी कि हम विशेष सत्र बुलाया जा रहा है। 19 सितम्बर को आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट का फ़ैसला आया था। दो महीने बाद तक सरकार का ध्यान इस ओर नहीं आया। सरकार अधिसूचना जारी कर सकती थी। भानुप्रतापपुर उप चुनाव 5 दिसम्बर को है। हमारा अनुरोध है कि सत्र 9 दिसंबर को बुलाया जाए। 8 दिसंबर को उप चुनाव के नतीजे आ जाएंगे।

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