छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत कोतवाली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गांजा तस्करी के एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में न केवल दो कथित तस्करों को गिरफ्तार किया गया, बल्कि जांच के दौरान दो पुलिस आरक्षकों की संलिप्तता भी सामने आने के बाद उन्हें भी गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।
मुखबिर सूचना पर हुई त्वरित कार्रवाई
पुलिस को दिनांक 28/02/2026 को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि रवि विश्वकर्मा नामक व्यक्ति, जो विवेकानंद कॉलोनी जशपुर में किराए के मकान में निवास करता है, अपने घर में भारी मात्रा में अवैध मादक पदार्थ गांजा रखे हुए है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए थाना कोतवाली की टीम ने तत्काल रेड कार्रवाई की योजना बनाई।
किराए के मकान से 24 पैकेट गांजा जब्त
रेड के दौरान पुलिस टीम ने मकान की तलाशी ली, जहां एक पेटी में रखे हुए कुल 24 पैकेट गांजा बरामद किए गए। बरामद मादक पदार्थ को विधिवत जब्त कर आरोपी रवि विश्वकर्मा को हिरासत में लिया गया।
पूछताछ के दौरान रवि विश्वकर्मा ने खुलासा किया कि उक्त गांजा उसे गोविंद उर्फ सुनील भगत द्वारा पैसे के एवज में अपने घर में रखने के लिए दिया गया था।
एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध दर्ज
प्रकरण में थाना जशपुर में अपराध क्रमांक 74/26 पंजीबद्ध करते हुए आरोपियों के विरुद्ध धारा 20 (B) एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला कायम किया गया। प्रारंभिक कार्रवाई के बाद आरोपी रवि विश्वकर्मा एवं सुनील भगत को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
पूछताछ में सामने आई पुलिसकर्मियों की भूमिका
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब मुख्य आरोपी गोविंद उर्फ सुनील से सघन पूछताछ की गई, तो चौंकाने वाला खुलासा सामने आया। पूछताछ में यह बात सामने आई कि थाना तपकरा में पदस्थ दो आरक्षक —
आरक्षक क्रमांक 581 धीरेंद्र मधुकर, पिता करतार सिंह, उम्र 37 वर्ष
आरक्षक क्रमांक 392 अमित त्रिपाठी, पिता स्वर्गीय राजदेव त्रिपाठी, उम्र 35 वर्ष
— कथित रूप से गांजा तस्करी के इस नेटवर्क में मिलकर कार्य कर रहे थे।
जांच में दोनों आरक्षकों की संलिप्तता पाए जाने पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
सभी आरोपी न्यायिक रिमांड पर
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरक्षकों को भी विधिवत न्यायालय में प्रस्तुत कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है, ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित व्यक्तियों की भी पहचान की जा सके।
इस पूरी कार्रवाई ने जिले में मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ पुलिस की सख्ती को तो दर्शाया ही है, साथ ही विभागीय अनुशासन और जवाबदेही का भी स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं — चाहे वह आम नागरिक हो या वर्दीधारी कर्मचारी।
मामले की आगे की जांच जारी है।




