जशपुरनगर। बंगाल की खाड़ी में मौसम के बदलते मिजाज का असर छत्तीसगढ़ में भी दिखाई देने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 25 अक्टूबर से प्रदेश में बारिश का दौर तेज हो सकता है। 28 और 29 अक्टूबर को कई जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की आशंका है। संभावित चक्रवात के दौरान हवा की रफ्तार 115 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। मौसम की स्थिति को देखते हुए किसानों को धान समेत अन्य फसलों की कटाई फिलहाल टालने और पहले से काटी गई उपज को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है।
दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ने से चक्रवाती तूफान विकसित होने की संभावना जताई गई है। इसके प्रभाव से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का असर देखने को मिल सकता है। भारी बारिश के दौरान 64 से 115 मिलीमीटर और बहुत भारी बारिश की स्थिति में 115 से 204 मिलीमीटर तक वर्षा दर्ज होने की संभावना है।
25 अक्टूबर को दक्षिण छत्तीसगढ़ में बारिश का जोर
मौसम विभाग के अनुसार, 25 अक्टूबर को बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा जिले में कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश हो सकती है। बालोद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, कांकेर, बीजापुर, कोंडागांव और नारायणपुर में भारी से बहुत भारी वर्षा की आशंका है। रायपुर, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, दुर्ग और राजनांदगांव जिलों में भी कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है।
26 अक्टूबर से बढ़ेगा बारिश का दायरा
26 अक्टूबर को दुर्ग, बालोद, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, कोंडागांव, कांकेर, नारायणपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बिलासपुर, मुंगेली, बेमेतरा, कबीरधाम, बस्तर और बीजापुर में एक-दो स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने का अनुमान है।
27 अक्टूबर को सरगुजा, जांजगीर-चांपा और सक्ती में कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। जशपुर, रायगढ़ और रायपुर में भी वर्षा की संभावना है। बलौदाबाजार-भाटापारा, सारंगढ़-बिलाईगढ़, महासमुंद, गरियाबंद, धमतरी, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर और बीजापुर के अनेक स्थानों पर बारिश हो सकती है। वहीं, बस्तर, सुकमा और दंतेवाड़ा के अधिकांश इलाकों में वर्षा होने का अनुमान है।
दो दिन प्रदेशभर में बारिश की संभावना
28 और 29 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में बारिश होने की संभावना जताई गई है। कुछ क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है। बारिश के दौरान रात के तापमान में बढ़ोतरी होने से अगले कुछ दिनों तक ठंड का असर कम रह सकता है। नागरिकों को मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखने और जरूरत के अनुसार सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
धान और दूसरी फसलों की कटाई फिलहाल टालें
मौसम की संभावित प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को अगले दो से चार दिनों तक पक चुकी धान, दलहन और तिलहन फसलों की कटाई नहीं करने की सलाह दी गई है। जिन किसानों ने फसल काट ली है, वे उपज को खुले खेतों में छोड़ने के बजाय सुरक्षित स्थान पर रखें, ताकि बारिश से नुकसान न हो।
खेतों में पानी जमा होने से फसल खराब होने का खतरा रहता है। इसलिए जल निकासी की उचित व्यवस्था करना जरूरी है। किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने की भी सलाह दी गई है। फसलों में कीट या बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद जरूरत के अनुसार कीटनाशक और कवकनाशक दवाओं का छिड़काव किया जा सकता है।
उतेरा फसल के रूप में तिवरा या अलसी बोने की तैयारी कर रहे किसान फिलहाल बुवाई कुछ दिनों के लिए टाल दें। रबी सीजन की फसलों की बुवाई नवंबर के पहले सप्ताह से शुरू करने की सलाह दी गई है।
सब्जियों और फलों की फसलों को बचाने के उपाय
तेज हवा और बारिश से सब्जियों तथा फलदार पौधों को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में किसानों को खेतों में पानी निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखने के साथ फसलों को सहारा देने के उपाय करने चाहिए।
फूलगोभी, ब्रोकली, चुकंदर, पछेती खीरा और पछेती करेला जैसी रबी सीजन की सब्जियों की बुवाई नवंबर के प्रथम सप्ताह से करना उचित होगा। करेला, लौकी और अन्य बेल वाली सब्जियों को तेज हवा से बचाने के लिए मजबूत सहारा दें। जिन केले के पौधों में फूल या फल आ चुके हैं, उन्हें बांस के सहारे से बांधकर सुरक्षित किया जाए। बागवानी और सब्जियों को संभावित ओलावृष्टि से बचाने के लिए उपलब्धता के अनुसार ओलावृष्टिरोधी जाली का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
पशुधन की सुरक्षा पर भी दें ध्यान
बारिश और आकाशीय बिजली की आशंका के बीच पशुपालकों को अपने मवेशियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है। पशुओं को सूखे और सुरक्षित स्थान पर रखें तथा उनके लिए पर्याप्त चारा और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराएं। बिजली गिरने की आशंका के दौरान पशुओं को चराने के लिए खुले स्थानों में ले जाने से बचें। ऐसी स्थिति में पेड़ों के नीचे आश्रय लेना भी जोखिम भरा हो सकता है।
मौसम में संभावित बदलाव को देखते हुए किसानों और पशुपालकों को समय रहते जरूरी इंतजाम करने, फसलों एवं पशुधन को सुरक्षित रखने और खेतों में जलभराव रोकने की अपील की गई है।

