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दुर्ग पुलिस द्वारा मानसिक स्वास्थ्य व नशामुक्ति पर कार्यशाला आयोजित,एसएसपी विजय अग्रवाल बोले –“तनाव छुपाना नहीं, साझा करना सीखें… पुलिस कर्मियों की मानसिक दृढ़ता ही संगठन की असली शक्ति”,

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दुर्ग, जिले में मानसिक स्वास्थ्य और नशा मुक्ति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा और जागरूकता हेतु महात्मा गांधी कला मंदिर, सिविक सेंटर, दुर्ग में एक जिला स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग श्री विजय अग्रवाल (भा.पु.से.) मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ डॉ. प्रमोद गुप्ता, निदेशक, सेंट्रल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड ब्यूरो साइंस, दुर्ग तथा श्री अजय कल्याणी, प्रबंधक, कल्याणी नशा मुक्ति केंद्र भी मंच पर उपस्थित थे।

एसपी विजय अग्रवाल का प्रेरणादायक उद्बोधन

अपने प्रभावशाली और संवेदनशील उद्बोधन में एसपी विजय अग्रवाल ने कहा,

> “पुलिस सिर्फ एक विभाग नहीं, यह समाज की नब्ज है। हर जवान के चेहरे पर तनाव नहीं, आत्मविश्वास होना चाहिए। मानसिक मजबूती जितनी जरूरी वर्दी पहनने के लिए है, उतनी ही जरूरी उसे सम्मान के साथ निभाने के लिए भी है।”

 

उन्होंने कहा कि आज की कार्यशाला केवल औपचारिकता नहीं बल्कि आत्ममंथन का अवसर है। पुलिस बल के प्रत्येक सदस्य को न केवल अपराध नियंत्रण बल्कि अपने निजी जीवन में संतुलन और मानसिक स्थिरता बनाए रखने की जरूरत है।

> “तनाव, अवसाद या पारिवारिक समस्याएं कोई कमजोरी नहीं हैं। असली ताकत है—उन्हें पहचानना और साझा करना। जब आप अपने भीतर की उलझनों को साथियों से बाँटते हैं, तभी समाधान की राह खुलती है।”

 

एसपी अग्रवाल ने कहा कि वर्दी केवल ताकत का प्रतीक नहीं, बल्कि नैतिक आचरण, संवेदना और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का संकेत है।
उन्होंने यह भी कहा:

> “हर पुलिसकर्मी अपने छोटे-बड़े निर्णयों से संगठन की छवि बनाता या बिगाड़ता है। इसलिए न केवल अपराधियों से लड़ें, बल्कि *अपने भीतर के तनाव और नकारात्मक सोच से भी मुकाबला करें।”

 

उन्होंने पुलिसकर्मियों को सलाह दी कि वे पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन में संतुलन बनाकर चलें। किसी भी प्रकार की मानसिक परेशानी होने पर उसे नजरअंदाज न करें, सर्वप्रथम किसी विश्वसनीय व्यक्ति से साझा करें।

विशेषज्ञों का मार्गदर्शन

डॉ. प्रमोद गुप्ता ने बताया कि वह वर्षों से पुलिस विभाग के साथ मानसिक स्वास्थ्य विषय पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने तनाव, अवसाद, PTSD, उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं के शारीरिक, मानसिक व सामाजिक कारणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। राजा परीक्षित के मनोवैज्ञानिक उदाहरण के माध्यम से उन्होंने तनाव-प्रबंधन की व्याख्या की।

अजय कल्याणी, प्रबंधक, नशा मुक्ति केंद्र ने कहा कि नशा न केवल व्यक्ति को बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि पुलिस बल में नशा मुक्ति के प्रयासों को निरंतर जारी रखना जरूरी है।

कार्यक्रम में अधिकारीगण की उपस्थिति

इस कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्री अभिषेक झा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) श्री सुखनंदन राठौर, उप पुलिस अधीक्षक (लाइन) श्री चंद्र प्रकाश तिवारी सहित बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।

— रिपोर्ट: THE PRIME NEWS

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Author: The Prime News

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