जशपुरनगर। ग्यारह सूत्रीय मांगों को लेकर अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन ने शुक्रवार को जिला मुख्यालय में एक दिवसीय सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया। लगातार रुक-रुककर हो रही वर्षा के बावजूद जिले के विभिन्न विभागों के कर्मचारी और अधिकारी बड़ी संख्या में रणजीता स्टेडियम चौक पहुंचे और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
धरना स्थल पर संबोधित करते हुए फेडरेशन के संतोष कुमार तांडे ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने “मोदी की गारंटी” के तहत राज्य के कर्मचारियों और पेंशनरों को केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देने की घोषणा की थी। लेकिन सरकार बने करीब दो साल होने को आए हैं और अब तक वादा पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने बार-बार ज्ञापन सौंपकर सरकार को उसके वादों की याद दिलाई, मगर अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
लघुवेतन छत्तीसगढ़ कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष दिलेश्वर राम रौतिया ने बताया कि इस आंदोलन में प्रदेशभर के लगभग 120 संगठन फेडरेशन के बैनर तले शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए एक माह का समय दिया है। यदि इस अवधि में मांगें पूरी नहीं की गईं तो 30 सितंबर से प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होगी। इस कारण होने वाली परेशानियों और अव्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
फेडरेशन ने अपनी ग्यारह सूत्रीय मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारी और पेंशनरों को केंद्र सरकार के बराबर महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) दिया जाए। लंबित डीए की राशि को जीपीएफ खाते में समायोजित किया जाए। लिपिक, शिक्षक, स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर करने गठित पिंगुआ समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और चार स्तरीय पदोन्नति तथा समयमान वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
साथ ही सहायक शिक्षकों और पशु चिकित्सा अधिकारियों को त्रिस्तरीय समयमान वेतन देने, अनुकंपा नियुक्ति में 10 प्रतिशत पदों की सीमा समाप्त करने, मध्यप्रदेश की तर्ज पर अर्जित अवकाश का नगदीकरण करने, नियुक्ति के प्रथम दिवस से सेवागणना कर लाभ देने, सेवा निवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने और सभी अनियमित एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण करने की भी मांग की गई है।




