दुर्ग, सड़कें केवल इंसानों के लिए नहीं होतीं, इन पर मूक प्राणियों की भी आवा-जाही होती है। और जब कोई ऐसा प्राणी दुर्घटनाग्रस्त होता है, तो अक्सर लोग नजरें फेर लेते हैं। लेकिन यातायात पुलिस दुर्ग ने एक ऐसी मिसाल कायम की है, जो मानवता की सच्ची तस्वीर पेश करती है।
घटना 18 जुलाई 2025 की है। भिलाई चरोदा बस स्टैंड के समीप एक तेज रफ्तार ट्रक ने एक नंदी को टक्कर मार दी। हादसे में नंदी बुरी तरह घायल हो गया। उसके पैर से तेज़ रक्तस्राव हो रहा था और वह दर्द से तड़प रहा था। आसपास के लोगों ने इस दृश्य को देखकर तुरंत यातायात नियंत्रण कक्ष दुर्ग को सूचना दी।
सूचना मिलते ही यातायात पुलिस के जवान मौके पर पहुंचे। लेकिन उन्होंने केवल अपनी ड्यूटी नहीं निभाई — उन्होंने मूक पीड़ा को अपनी जिम्मेदारी समझा। घायल नंदी को उन्होंने तुरंत सहारा दिया और bleeding रोकने के लिए प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की। ‘युवा शक्ति टीम, भिलाई चरोदा’ को मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने तुरंत फर्स्ट एड दिया।
मगर यहीं पुलिस का कर्तव्य नहीं रुका — उन्होंने उपचार के लिए नंदी को रायपुर स्थित पंडरी पशु चिकित्सालय भिजवाया, ताकि उसे समुचित चिकित्सा मिल सके। इस दौरान सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि इलाज का सारा खर्च खुद पुलिसकर्मियों ने अपने निजी वेतन से वहन किया — बिना किसी सरकारी प्रक्रिया, औपचारिकता या प्रचार के।
यह कार्यवाही दर्शाती है कि वर्दी केवल अनुशासन या नियंत्रण का प्रतीक नहीं होती, बल्कि वह संवेदना, कर्तव्य और करुणा की पहचान भी बन सकती है। जब समाज चुप रहता है, तब ऐसे पुलिसकर्मी इंसानियत की सबसे ऊंची मिसाल बन जाते हैं।
दुर्ग की यातायात पुलिस का यह कदम केवल एक घायल नंदी को राहत नहीं देता, बल्कि पूरे समाज को यह सिखाता है कि पीड़ा चाहे किसी की भी हो, उसे अनदेखा करना सबसे बड़ा अपराध है।




