Advertisements

जीवित लोगों को ‘मृत’ बताकर 1.19 करोड़ की एनपीएस बीमा ठगी का पर्दाफाश,फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और केवाईसी से दावे पास, ऑनलाइन सेवा केंद्र संचालक गिरफ्तार; एचडीएफसी लाइफ के पूर्व कर्मचारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में

Picture of The Prime News

The Prime News

SHARE:

 

जिला दुर्ग के पाटन थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) से जुड़ी एक बड़ी बीमा धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है, जिसमें जीवित व्यक्तियों को मृत दर्शाकर लगभग 1 करोड़ 19 लाख रुपये की राशि फर्जी तरीके से निकाले जाने का मामला सामने आया है। मामले में थाना पाटन पुलिस ने एक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
कंपनी की शिकायत पर खुला राज
प्रकरण में 16 फरवरी 2026 को HDFC Life Insurance Company Limited, बोकारो (झारखंड) के प्रबंधक द्वारा लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई थी। शिकायत में बताया गया कि एनपीएस खातों से फर्जी मृत्यु दावा प्रस्तुत कर भारी राशि का अनियमित भुगतान किया गया है। प्रारंभिक जांच के बाद पाटन थाना में अपराध क्रमांक 74/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 316, 318, 336(2), 337, 338, 339, 340(2), 61(2), 3(5) के तहत मामला कायम किया गया।
जीवित व्यक्ति के नाम पर निकाली गई बीमा राशि
पुलिस जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपीगणों ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मृत दर्शाते हुए जाली मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किए। इतना ही नहीं, फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड एवं अन्य केवाईसी दस्तावेजों का उपयोग कर बीमा दावा प्रस्तुत किया गया। जांच में पाया गया कि संबंधित व्यक्ति जीवित हैं, जबकि उनके नाम पर मृत्यु दावा पास कर राशि जारी कर दी गई।
मृत्यु दावों में समान पते, अमान्य क्यूआर कोड युक्त प्रमाण पत्र तथा संदिग्ध बैंक खातों के माध्यम से लेन-देन जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि पूरे प्रकरण को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया।
ऑनलाइन सेवा केंद्र से संचालित होता था फर्जीवाड़ा
मुख्य आरोपी राजेश कनोजिया (44 वर्ष), निवासी पंचशील सेक्टर-01, बोरसी, दुर्ग, क्षेत्र में एक ऑनलाइन सेवा केंद्र संचालित करता है। जांच में खुलासा हुआ कि वह एनपीएस निकासी में सहायता के नाम पर ग्राहकों से आधार, पैन एवं बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी प्राप्त करता था। बाद में इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कर दावा प्रक्रिया पूरी की जाती थी।
कंपनी के पूर्व कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध
मामले में एचडीएफसी लाइफ के पूर्व कर्मचारी राजेश कुमार ठाकुर की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जाली दस्तावेजों को सिस्टम में अपलोड किया तथा सत्यापन प्रक्रिया को दरकिनार किया। पुलिस इस पहलू की भी गहन जांच कर रही है कि क्या इस फर्जीवाड़े में अंदरूनी मिलीभगत थी।
जप्ती और तकनीकी साक्ष्य
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से ₹10,000 नगद एवं फर्जी दस्तावेजों से संबंधित डिजिटल साक्ष्य जप्त किए हैं। तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आरोपी की पहचान कर उसे विधिवत गिरफ्तार किया गया।
पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका
पूरे मामले की विवेचना में थाना पाटन के थाना प्रभारी निरीक्षक राजेश मिश्रा, उप निरीक्षक स्तर के अधिकारियों एवं थाना स्टाफ की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। डिजिटल ट्रेल और दस्तावेजों के तकनीकी परीक्षण के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई गई।
दुर्ग पुलिस की अपील
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे बीमा अथवा पेंशन योजनाओं से संबंधित अपनी व्यक्तिगत जानकारी किसी भी अनधिकृत व्यक्ति या संस्था को साझा न करें। किसी भी प्रकार की संदिग्ध वित्तीय गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।

The Prime News
Author: The Prime News

Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement Carousel
Advertisements
और पढ़ें
error: Content is protected !!