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राहुल ने बताया 1977 की वह कहानी सुनाई जब उनकी मां ने उनसे कहा था कि हम घर छोड़ रहे हैं।

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Mohit Prakash

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रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का आज आखिरी दिन है। पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी महाधिवेशन को संबोधित कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने 1977 की वह कहानी सुनाई जब उनकी मां ने उनसे कहा था कि हम घर छोड़ रहे हैं।

 

राहुल गांधी ने अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा, 1977 की बात है, जब मैं छोटा सा था। चुनाव आया, मुझे चुनाव के बारे में मालूम नहीं था। उस समय 6 साल का था मैं। 1 दिन घर में अजीब सा माहौल था, मैं मां के पास गया और उनसे पूछा मम्मी क्या हुआ? तब मां ने कहा हम घर छोड़ रहे हैं। तब तक मैं सोचता था कि यह घर हमारा है, मैंने मां से पूछा मां हम अपने घर को क्यों छोड़ रहे हैं?

 

पहली बार मां ने मुझे बताया कि राहुल यह हमारा घर नहीं है, यह सरकार का घर है। अब हमें यहां से जाना है। मैंने मां से पूछा मां कहां जाना है? कहती है नहीं मालूम। मैं हैरान हो गया, मैंने सोचा था वह हमारा घर था। 52 साल हो गए मेरे पास घर नहीं है, आज तक घर नहीं है और हमारे परिवार का जो घर है वह इलाहाबाद में है। वह भी हमारा घर नहीं है।

 

 

राहूल बोले- जहां मैं रहता हूं वह मेरे लिए घर नहीं है।

 

राहुल गांधी ने आगे कहा कि, जो घर होता है उसके साथ मेरा बड़ा अजीब सा रिश्ता है, 12 तुगलक लेन में रहता हूं। मगर मेरे लिए वह घर नहीं है। जब मैं कन्याकुमारी से निकला तो अपने आप से पूछा, भई मेरी जिम्मेदारी क्या बनती है? अब मैं चल रहा हूं, भारत का दर्शन करने निकला हूं, भारत को समझने के लिए निकला हूं, हजारों-लाखों लोग चल रहे हैं, भीड़ है, मेरी क्या जिम्मेदारी है? मैंने थोड़ी देर सोचा फिर मेरे दिमाग में एक आईडीया आया।

 

भारत जोड़ो यात्रा में ये जगह बना राहुल का घर

मैंने ऑफिस के लोगों को बुलाया। मैंने उन्हें कहा देखिए यहां पर हजारों लोग चल रहे हैं, धक्का लगेगा, लोगों को चोट लगेगी, बहुत भीड़ है। हमें एक काम करना है, मेरे साइड में मेरे सामने-पीछे, अगल-बगल 20-25 फुट जगह है, यह जो खाली जगह है, जिसमें हिंदुस्तान के लोग आएंगे, अगले 4 महीने के लिए वह हमारा घर है। मतलब यह घर हमारे साथ चलेगा। सुबह 6ः00 बजे से शाम 7ः00 बजे तक घर हमारे साथ चलेगा।

 

मैंने सभी से कहा इस घर में जो भी आएगा चाहे वह अमीर हो, गरीब हो, बुजुर्ग, युवा, नवजवान और छात्र हो, किसी भी धर्म का हो, किसी भी राज्य का हो, हिंदुस्तान से बाहर का हो चाहे कोई जानवर हो उसको यह लगना चाहिए कि मैं आज अपने घर आया हूं और जब वह यहां से जाए तो उसे लगना चाहिए अपने घर को छोड़कर जा रहा हूं। छोटा सा आईडिया था मुझे समझ नहीं आई जैसे ही मैंने यह किया, जिस दिन मैंने यह किया, उस दिन यात्रा बदल गई।

 

राहूल बोले- देश के लोग कितना बोझ उठा रहे है मैं बता नहीं सकता

राहुल गांधी ने आगे कहा कि लोग मेरे साथ राजनीतिक बात नहीं कर रहे थे। मैंने क्या-क्या सुना, मैं आपको बता नहीं सकता। हिंदुस्तान की महिलाओं ने मुझे क्या कहा है इस देश के बारे में, मैं आपको बता नहीं सकता। युवाओं के दिल में दर्द क्या है? कैसा है? मैं आपको बता नहीं सकता, समझा नहीं सकता ये लोग कितना बोझ उठा रहे हैं।

Mohit Prakash
Author: Mohit Prakash

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