रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि नक्सलवाद की चुनौती से बाहर निकलकर छत्तीसगढ़ अब विकास, निवेश, सुशासन और नवाचार के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। विकसित भारत@2047 की यात्रा में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बनाएगा। सरकार की प्राथमिकता प्रदेश की प्राकृतिक संपदा, युवा शक्ति और विकास की संभावनाओं को जनकल्याण, रोजगार और आर्थिक समृद्धि में बदलना है।
मुख्यमंत्री साय शनिवार को रायपुर के वीआईपी रोड स्थित एक निजी होटल में समाचार चैनल लाइव टाइम्स द्वारा आयोजित ‘नक्सलमुक्त विकासयुक्त छत्तीसगढ़@2047’ कार्यक्रम ‘एलटी एक्सचेंज’ में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान, बस्तर के विकास, किसान कल्याण, महिला सशक्तीकरण, आवास, निवेश, सुशासन, डिजिटल गवर्नेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित प्रदेश के भविष्य से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से अपने विचार रखे।
नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता के बाद बदली छत्तीसगढ़ की तस्वीर
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक छत्तीसगढ़ की पहचान नक्सलवाद की समस्या से अधिक जुड़ी हुई थी, लेकिन अब परिस्थितियां तेजी से बदली हैं। केंद्र और राज्य में डबल इंजन की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद के खिलाफ नई रणनीति और बेहतर समन्वय के साथ अभियान चलाया गया।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के साहस, समर्पण और बलिदान के कारण नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली है। सरकार अब सुरक्षा के साथ-साथ विकास और जनविश्वास को भी अपनी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानकर आगे बढ़ रही है।
सुरक्षा कैंप बने ‘सेवा डेरा’, गांवों तक पहुंच रही सरकार
साय ने कहा कि बस्तर के ग्रामीण इलाकों को दशकों तक नक्सलवाद के कारण सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा। सरकार ने इसी चुनौती को देखते हुए ‘नियद नेल्लानार’ योजना शुरू की। सुरक्षा कैंपों के आसपास के गांवों तक राशन, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित की गई।
अब सुरक्षा कैंपों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने के साथ ग्रामीणों को सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी अंचल बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य बस्तर को देश के सबसे विकसित आदिवासी अंचलों में शामिल करना है। इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन, वनोपज, पर्यटन और कनेक्टिविटी पर एक साथ काम किया जा रहा है।
नक्सल हिंसा के कारण बंद हुए स्कूलों को फिर से शुरू किया गया है। आदिवासी बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्राथमिक स्तर पर गोंडी और हल्बी जैसी स्थानीय भाषाओं में पढ़ाई की व्यवस्था की गई है। दंतेवाड़ा की तर्ज पर ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित करने का प्रावधान किया गया है, जबकि गीदम में मेडिकल कॉलेज को मंजूरी दी गई है।
उन्होंने बताया कि बस्तर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होमस्टे विकसित किए जा रहे हैं तथा इसके लिए ऋण और सब्सिडी की व्यवस्था की जा रही है। वनोपज के वैल्यू एडिशन के जरिए स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने पर भी सरकार का जोर है।
सिंचाई और कृषि पर भी विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के किसानों को सिंचाई सुविधा से जोड़ने के लिए इंद्रावती नदी पर देऊरगांव और मटनार परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 80 हजार एकड़ क्षेत्र को सिंचाई सुविधा से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। ‘नियद नेल्लानार 2.0’ का रोडमैप भी तैयार किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है और लगभग 75 प्रतिशत किसान छोटे एवं सीमांत श्रेणी के हैं। सरकार किसानों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीद रही है। किसानों की आय बढ़ाने के साथ सिंचाई और आधुनिक कृषि को बढ़ावा दिया जा रहा है।
18 लाख आवास की स्वीकृति, प्रतिदिन बन रहे 1600 घर
साय ने कहा कि सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों को स्वीकृति दी गई थी। पिछले दो वर्षों में 11 लाख से अधिक आवासों का निर्माण हो चुका है और प्रदेश में प्रतिदिन करीब 1600 आवास बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गरीब परिवार के लिए पक्का मकान केवल छत नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का आधार है।
महतारी वंदन से महिलाओं को आर्थिक संबल
महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है और अब तक 31 किश्तों की राशि प्रदान की जा चुकी है। महिलाओं द्वारा इस राशि का उपयोग घरेलू जरूरतों के साथ किराना दुकान, सिलाई मशीन और अन्य आजीविका गतिविधियों में किया जा रहा है।
निवेश से खुलेंगे रोजगार के नए द्वार
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई औद्योगिक नीति और निवेश अनुकूल वातावरण के कारण छत्तीसगढ़ को लगभग सवा आठ लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सेमीकंडक्टर प्लांट, डेटा सेंटर और अन्य आधुनिक तकनीक आधारित परियोजनाएं प्रदेश में आकार ले रही हैं। नवा रायपुर में लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में मेडिसिटी विकसित की जा रही है।
देश के प्रमुख महानगरों के साथ जापान और दक्षिण कोरिया में भी इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य केवल निवेश लाना नहीं, बल्कि निवेश के माध्यम से बड़े पैमाने पर रोजगार, आधुनिक तकनीक और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर पैदा करना है।
डिजिटल गवर्नेंस और AI से बदलेगी शासन व्यवस्था
साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जहां सुशासन एवं अभिसरण विभाग बनाया गया है। ई-फाइल प्रणाली लागू करने के साथ सरकारी प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण किया जा रहा है, जिससे प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ रही है।
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए राज्य में AI मिशन पर भी काम किया जा रहा है। इसके तहत छह लाख विद्यार्थियों और लगभग डेढ़ लाख कर्मचारियों को AI का प्रशिक्षण देने की तैयारी है। शासन के विभिन्न विभागों की कार्यक्षमता बढ़ाने और नागरिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में भी AI के उपयोग की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।
विकसित भारत@2047 में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति, बस्तर में शांति और विकास, गरीब कल्याण, महिला सशक्तीकरण, किसान हित, औद्योगिक निवेश, तकनीक और पारदर्शी प्रशासन—इन सभी क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ एक साथ आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल मौजूदा समस्याओं का समाधान करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, समृद्ध, आत्मनिर्भर और अवसरों से भरपूर छत्तीसगढ़ तैयार करना है। विकसित भारत@2047 के संकल्प में छत्तीसगढ़ अपनी पूरी क्षमता के साथ योगदान देगा और देश के अग्रणी राज्यों में अपनी सशक्त पहचान स्थापित करेगा।




