शिक्षकों के विरोध के बीच शुरू हुई युक्तियुक्तकरण की काउंसलिंग प्रक्रिया,रिक्त पदों की जानकारी सार्वजनिक करने और प्रक्रिया स्थगन की मांग को लेकर शिक्षकों का धरना

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जशपुर। जिले में शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण को लेकर शिक्षा विभाग द्वारा सोमवार को शासकीय आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल के सभागार में काउंसलिंग प्रक्रिया की शुरुआत कर दी गई। पहले दिन व्याख्याता वर्ग के 225 शिक्षकों की काउंसलिंग की गई। हालांकि यह प्रक्रिया शिक्षक संगठनों के विरोध के बीच शुरू हुई। जिला स्तर पर विभिन्न शिक्षक संघों के संयुक्त मोर्चा ने इस प्रक्रिया को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है और अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

शिक्षकों की मांग है कि युक्तियुक्तकरण के बाद रिक्त पदों की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए, और तब तक काउंसलिंग की प्रक्रिया को स्थगित रखा जाए। इसी मांग को लेकर आंदोलनरत शिक्षकों ने रैली निकालते हुए कांउसलिंग स्थल का घेराव किया और जिला शिक्षा अधिकारी पीके भटनागर को ज्ञापन सौंपा।

डीईओ पीके भटनागर ने कहा कि काउंसलिंग की पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ की जा रही है। उन्होंने बताया, “पहले दिन 225 शिक्षकों की काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरे पारदर्शिता के साथ किया गया है। इसमें किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है।” साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी चरणों में नियमों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है।

रणजीता स्टेडियम में जुटे शिक्षक, महिलाओं की भी रही भागीदारी
धरना प्रदर्शन की शुरुआत सोमवार सुबह रणजीता स्टेडियम के पास हुई, जहां जिले भर से आए सैकड़ों शिक्षकों ने एकजुटता दिखाई। दोपहर लगभग 2 बजे शिक्षकों ने रैली की शक्ल में नारेबाजी करते हुए काउंसलिंग स्थल की ओर कूच किया। सुरक्षा के कड़े इंतज़ामों के बीच शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने डीईओ को ज्ञापन सौंपा, जिसमें रिक्त पदों की सार्वजनिक जानकारी, और प्रभावित शिक्षकों को अपनी बात रखने का अवसर देने की मांग की गई।

प्रशासन से तत्काल निर्णय की मांग, चेतावनी दी धरना तेज़ करने की
संयुक्त मोर्चा के जिला संचालक संतोष टांडे ने बताया कि डीईओ ने कलेक्टर से चर्चा कर उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। वहीं, मोर्चा से जुड़े अजय गुप्ता ने कहा कि वे युक्तियुक्तकरण के खिलाफ नहीं, बल्कि उसकी प्रक्रिया में हो रही अनियमितताओं और 2008 के स्वीकृत सेटअप में हो रही छेड़छाड़ का विरोध कर रहे हैं।

महिला शिक्षिका तरन्नुम ने चिंता जताई कि बारिश और रात के समय खुले में प्रदर्शन करने के दौरान महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन जिम्मेदार होगा। उन्होंने कहा कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो शिक्षक रातभर धरने पर बैठे रहेंगे।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार शिक्षकों और विद्यार्थियों के अनुपात को संतुलित करने के उद्देश्य से युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया चला रही है। परंतु शिक्षक संघों का कहना है कि यह प्रक्रिया बिना समुचित पारदर्शिता और संज्ञान के चल रही है, जिससे सैकड़ों शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं।

 

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Author: The prime news

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