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जब रपटे में मुसीबत में फंसी जान,तो इस तरह बढ़े मदद के लिए हाथ

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सूरजपुर द प्राइम न्यूज नेटवर्क। आषाढ़ महीने भर आंख मिचौली खेलने के बाद, सावन महीने के दस्तक के साथ ही प्रदेश भर में हुई झमाझम बारिश से एक ओर किसानों के चेहरे खिले हुए हैं,वहीं दूसरी ओर पुल पुलिया विहीन गांवों में मानसून की मेहरबानी मुसिबत साबित हो रही है। सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड के धरसेड़ी गांव में हुई घटना से ग्रामीणों दर्द को समझा जा सकता है। दरअसल,इस गांव का निवासी सोमर साय, शनिवार को घर से किसी काम से पड़ोस के गांव आया हुआ था। काम निबटा कर घर वापस जाने के लिए वह साइकिल से रवाना हुआ तो उसे अनुमान भी नहीं था कि वह किस मुसीबत में फंसने वाला है। गांव के बाहर बहने वाली पहाड़ी नाला उफान पर थी। लेकिन,इस तरह के नदी नाले को पार करना इस गांवों के रहवासियों के लिए आमबात है,सो सोमर साय,साइकिल सहित रपटे को पार करने लगा। लेकिन,नाले की धारा सोमर के अनुमान से अधिक तेज थी। जिससे वह रपटे के बीच मे पाने की तेज धार में संतुलन खो बैठा और बहने लगा। संयोग से,नाले के पास नगर सैनिक रमेश सारथी मौजूद थे,उन्होंने तुरंत रस्सी के सहारे सोमर साय को नाले से बाहर खींच कर सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस तरह,सोमर साय की जान तो बच गई,लेकिन ग्रामीण अंचल की समस्या को ना तो गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ के नारे से निजात मिल पा रही है और ना ही अच्छे दिन के सुनहरे ही दिन बहुर रहे हैं।

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Author: The prime news

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