केंद्रीय नेतृत्व की छत्तीसगढ़ पर पैनी नजर, स्मृति ईरानी लेंगी सरकार-संगठन का रिपोर्ट कार्ड

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केंद्रीय मंत्री और छत्तीसगढ़ भाजपा की प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी आज रायपुर पहुंचेंगी, जहां वे प्रदेश सरकार और संगठन के कामकाज की गहन समीक्षा करेंगी। उनके साथ प्रदेश सह-प्रभारी सिद्धार्थ शंभू भी छत्तीसगढ़ आएंगे। दोनों नेता 25 और 26 अक्टूबर को प्रदेश भाजपा कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में संगठन के पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ कुल 12 महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल होंगे।

आज, दौरे के पहले दिन, प्रदेश पदाधिकारियों, संभाग और जिला प्रभारियों, पूर्व विधायकों-सांसदों और पूर्व प्रदेश पदाधिकारियों के साथ बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में संगठन की वर्तमान स्थिति और जमीनी स्तर पर उसकी सक्रियता पर चर्चा होगी। शाम को भाजपा कोर ग्रुप की एक महत्वपूर्ण बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें पार्टी की रणनीतिक दिशा पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

वहीं, दौरे के दूसरे दिन, विधायकों, सांसदों, मंत्रियों, निगम-मंडल और आयोगों के अध्यक्ष-उपाध्यक्षों के साथ-साथ विचार परिवार के प्रतिनिधियों से चर्चा की जाएगी। इन बैठकों के माध्यम से सरकार के विभिन्न स्तरों पर किए जा रहे कार्यों और उनकी प्रगति का आकलन किया जाएगा, साथ ही संगठन के साथ उनके समन्वय को भी परखा जाएगा।

इन बैठकों में मंत्रियों के विभागीय कामकाज की समीक्षा के साथ-साथ संगठन का जमीनी फीडबैक भी एक अहम बिंदु रहेगा। पार्टी का विशेष ध्यान 2023 के विधानसभा चुनाव में हारी हुई 36 सीटों पर केंद्रित रहेगा। इन क्षेत्रों में संगठन की स्थिति, बूथ समितियों की सक्रियता और पन्ना प्रमुखों की भूमिका की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। इसका उद्देश्य यह समझना है कि पिछली बार इन सीटों पर पार्टी कहां कमजोर रही और आगामी चुनाव से पहले किन स्तरों पर सुधार की आवश्यकता है।

मंत्रियों से उनके विभागों की उपलब्धियों का ब्योरा लिया जाएगा, जिसमें योजनाओं की घोषणा और उनके वास्तविक क्रियान्वयन के बीच का अंतर सबसे अहम सवाल होगा। विभाग ने अब तक कौन-कौन से लक्ष्य पूरे किए हैं, कितने काम लंबित हैं और किन परियोजनाओं में देरी हो रही है, इसकी जानकारी महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, ‘मोदी की गारंटी’ के कितने काम हुए और इसके लिए विभागीय योजनाओं की प्रगति, स्वीकृत और पूर्ण परियोजनाओं, बजट के उपयोग और लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचने की स्थिति का विवरण मांगा जा सकता है। जिन योजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है, उनमें देरी के कारण और उन्हें पूरा करने की समय सीमा भी तय की जा सकती है। इसके अलावा, विभाग से जुड़े विवाद, लंबित मामले, जनता की शिकायतें और प्रशासनिक स्तर पर आ रही अड़चनें भी कामकाज की पूरी तस्वीर समझने में अहम होंगी। इससे उपलब्धियों के साथ उन क्षेत्रों की पहचान भी की जा सकती है, जहां सुधार की जरूरत है।

मंत्रियों को जिलों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है, ऐसे में उनके कामकाज का आकलन केवल विभागीय प्रदर्शन से नहीं, बल्कि प्रभार वाले जिलों में उनकी सक्रियता से भी जुड़ा होगा। उनसे जानकारी ली जा सकती है कि मंत्री नियमित रूप से जिलों में जा रहे हैं या नहीं, मासिक बैठकें हो रही हैं या नहीं और कार्यकर्ताओं तथा जनता की समस्याओं पर कितना ध्यान दिया जा रहा है। जिलाध्यक्षों, जिला प्रभारियों, विधायकों और सांसदों से भी इस संबंध में फीडबैक लिया गया था। बैठक में मंत्रियों से उनके प्रभार वाले जिलों में की गई बैठकों, उठाए गए मुद्दों और समस्याओं के समाधान की जानकारी मांगी जा सकती है, जैसे कि पिछले कुछ महीनों में कितने दौरे किए, जिला संगठन के साथ कितनी बैठकें हुईं, कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई और प्रशासनिक समस्याओं को दूर करने के लिए क्या पहल की गई।

मंत्री अपने कामकाज का ब्योरा देंगे, लेकिन जिला स्तर पर संगठन की स्थिति की जानकारी जिलाध्यक्षों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के पास भी होती है। ऐसे में दोनों स्तरों से मिली जानकारी को साथ रखकर देखने से सरकार और संगठन के बीच तालमेल की स्थिति समझी जा सकती है। यदि किसी मंत्री की ओर से जिले में नियमित बैठकों और समस्याओं के समाधान का दावा किया जाता है, तो स्थानीय संगठन से मिलने वाला फीडबैक उस तस्वीर को और स्पष्ट कर सकता है। कार्यकर्ताओं की नाराजगी, प्रशासनिक अधिकारियों से समन्वय की समस्या और जनता से जुड़े लंबित मुद्दे भी इस आकलन के महत्वपूर्ण पहलू हो सकते हैं। सरकारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाना केवल प्रशासनिक काम नहीं, बल्कि संगठनात्मक जनसंपर्क से भी जुड़ा है। ऐसे में नेताओं की सोशल मीडिया गतिविधियां और सरकारी योजनाओं के प्रचार में उनकी भूमिका भी समीक्षा का हिस्सा हो सकती है। भाजपा नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट और केंद्र तथा राज्य सरकार की योजनाओं के प्रचार को लेकर जानकारी मांगने की बात भी कही जा रही है।

स्मृति ईरानी के दो दिवसीय दौरे में सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों से बातचीत प्रस्तावित है। इन बैठकों के जरिए पार्टी सरकार के कामकाज और संगठन की गतिविधियों की स्थिति समझ सकती है। साथ ही, आगामी 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठनात्मक प्राथमिकताओं पर चर्चा भी हो सकती है। दौरे के बाद यह स्पष्ट होगा कि पार्टी किन क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने पर जोर देती है और क्या बूथ स्तर तक कामकाज की समीक्षा के लिए कोई समयसीमा या नई जिम्मेदारी तय की जाती है। 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 90 में से 54 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि बाकी 36 सीटों पर पार्टी को हार मिली थी। आगामी विधानसभा चुनाव 2028 में होना है। ऐसे में जिन क्षेत्रों में पिछली बार पार्टी को सफलता नहीं मिली, वहां संगठन की स्थिति और चुनावी चुनौतियों को समझना महत्वपूर्ण होगा। इन सीटों पर हार के कारण हर जगह एक जैसे नहीं थे, कहीं स्थानीय मुद्दे महत्वपूर्ण थे, तो कहीं उम्मीदवार, संगठन की सक्रियता या बूथ स्तर पर कमजोरियां प्रभावी रहीं। विधानसभा क्षेत्रवार समीक्षा से इन अलग-अलग परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है। लिहाजा, यह माना जा रहा है कि इन 36 सीटों की समीक्षा बैठक में की जा सकती है।

चुनाव में बूथ स्तर का संगठन पार्टी की रणनीति को मतदाताओं तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बूथ समितियां स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने, मतदाताओं से संपर्क बनाने और पार्टी के कार्यक्रमों को जमीन पर लागू करने का काम करती हैं। वहीं, पन्ना प्रमुखों की जिम्मेदारी मतदाता सूची के निर्धारित हिस्से में मतदाताओं से संपर्क बनाए रखने की होती है। इसलिए, प्रदेश प्रभारी बूथ समिति के पुनर्गठन के लिए एक एक्शन प्लान तैयार करके देंगी। इसके लिए बूथ पर विशेष सदस्यों का गठन किया जा सकता है, ताकि जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ और मजबूत हो सके।

स्मृति ईरानी के दौरे में सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों से अलग-अलग चर्चा की योजना है। ऐसे में बैठकों से सरकार के कामकाज, संगठन की सक्रियता और आगामी चुनाव की तैयारियों को लेकर पार्टी की प्राथमिकताओं के संकेत मिल सकते हैं। मंत्रियों के विभागीय प्रदर्शन, प्रभार वाले जिलों में सक्रियता, कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल और हारी हुई सीटों पर संगठन की स्थिति जैसे विषयों पर मिली जानकारी के आधार पर आगे के काम तय किए जा सकते हैं। हालांकि, समीक्षा के बाद मंत्रिमंडल में बदलाव होगा या किसी नेता को नई जिम्मेदारी मिलेगी, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। फिलहाल, इस दौरे का महत्वपूर्ण पहलू यही रहेगा कि पार्टी सरकार और संगठन के कामकाज का आकलन किन आधारों पर करती है और सामने आने वाली कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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Author: News Desk

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