जशपुर नगर, द प्राइम न्यूज नेटवर्क। जी हां,सही सुना आपने,जशपुर शहर में ना शासन का और ना ही प्रशासन का हुकूमत चलता है। चलता है तो बस नगर सरकार की मनमानी। अब, सरकार जिस हाल में रखे,उस हाल में तो रहना पड़ेगा जनता को। आप बोलेंगे ऐसा कैसे हो सकता है? जिला मुख्यालय है,आला प्रशासनिक अधिकारी यहां बैठते हैं,फिर कैसे किसी की मनमानी चल सकती है। तो चलिए देखिए हाल ए शहर, और कर लीजिए निर्णय,

वैसे हो सकता है आप सही भी बोल रहे हों,नगर सरकार की कुछ मजबूरी हो सकती है। अब शहरी गोठान के लिए नगर सरकार को जमीन नही मिल पा रही है तो उसका कसूर क्या है? इसलिए,फिलहाल तो सड़क को ही गोठान बना रहने दिया जाए। अब इन बेचारे बेजुबान मवेशियों को भी तो रहने का मौलिक अधिकार है ना! अब अगर आप पशु प्रेमी हैं तो इससे आपको तकलीफ नहीं होना चाहिए। बस थोड़ा सम्हल कर चलिए। दिल और दिमाग मे डर बैठाए रहिए,सड़क में कहीं भी,कभी भी आपका सामना इन मवेशियों से हो सकता है।

चलिए, अब बात करते है सड़क सुरक्षा की। तो आपकी सुरक्षा आपके हाथों में है। इसमे भला नगर सरकार क्या कर सकती है? ठीक है,प्रदेश सरकार ने रोका छेका अभियान के दौरान सड़क में निराश्रित मवेशी दिखाई देने पर नगरीय निकाय के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी थी। मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने भी सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बैठक कर लम्बा चौड़ा निर्देश दिया था। हाल ही में सड़क सुरक्षा को लेकर समीक्षा बैठक भी आयोजित हुई। तो ये सब तो रूटीन का काम है। बैठक खत्म,काम भी खत्म। निर्देश को देने वाले अधिकारी ही याद नहीं रखते हैं,बाकी की तो बात ही मत कीजिए।

इसलिए, मुस्कुराते रहिए जनाब,आप जशपुर में है। और फिर विपरीत परिस्थितियों में मुस्कुराना ही तो असली मुस्कुराहट है। इसलिए,इस्माइल प्लीज!!!




