केंद्र सरकार को झटका, हाईकोर्ट ने कहा- डाक-सेवक उम्मीदवार अयोग्य नहीं

Picture of News Desk

News Desk

SHARE:

[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ग्रामीण डाक सेवक की नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में केंद्र सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के उस आदेश को सही ठहराया है, जिसमें कहा गया था कि जिस अभ्यर्थी को 20 दिसंबर 2012 को अंकसूची और प्रमाणपत्र जारी किया गया था, उसे केवल संबंधित बोर्ड की मान्यता निलंबित होने के आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।

यह मामला हेमचरण साहू, उत्तरा कुमार समेत अन्य अभ्यर्थियों के चयन से संबंधित है, जिनका चयन ग्रामीण डाक सेवक के पद पर हुआ था। इस पद के लिए 10वीं कक्षा उत्तीर्ण होना और गणित व अंग्रेजी विषयों की जानकारी अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता थी। इन अभ्यर्थियों ने छत्तीसगढ़ बोर्ड ऑफ स्कूल एंड टेक्निकल एजुकेशन का प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था।

हालांकि, विभाग ने इन प्रमाणपत्रों को मान्यता प्राप्त माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का नहीं माना। केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय के 24 दिसंबर 2021 के पत्र का हवाला देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ में केवल छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, रायपुर और छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल, रायपुर ही मान्य हैं। इस आधार पर उम्मीदवारों की नियुक्ति पर विचार नहीं किया गया।

विभाग द्वारा नियुक्ति पर विचार न किए जाने से परेशान होकर, संबंधित अभ्यर्थियों ने पहले केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) में याचिका दायर की थी। कैट ने इन अभ्यर्थियों की याचिका को स्वीकार करते हुए उनके पक्ष में फैसला सुनाया था।

कैट के इस फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार और चीफ पोस्ट मास्टर ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील दायर की। अपील में यह तर्क दिया गया कि अभ्यर्थियों ने जिस बोर्ड की अंकसूची और प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए हैं, उसे केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने मान्यता नहीं दी है। साथ ही, यह भी बताया गया कि उस बोर्ड की मान्यता भी निलंबित कर दी गई है।

वहीं, याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों की ओर से हाईकोर्ट में यह दलील दी गई कि उन्हें प्रमाणपत्र और अंकसूची 20 दिसंबर 2012 को जारी की गई थी। इसलिए, उन्हें ग्रामीण डाक सेवक के पद पर नियुक्ति के लिए विचार किए जाने से वंचित नहीं किया जा सकता।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और संबंधित तथ्यों व दस्तावेजों पर विचार करने के बाद, हाईकोर्ट ने पाया कि कैट ने अभ्यर्थी को न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के लिए पात्र माना है। डिवीजन बेंच ने कैट के आदेश में किसी भी प्रकार की त्रुटि नहीं पाई।

अंततः, हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की अपील को खारिज करते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है, जिससे उन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है जिनके प्रमाणपत्र बोर्ड की मान्यता निलंबित होने से पहले जारी किए गए थे।

News Desk
Author: News Desk

Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!