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लोधमा में संघ का विराट हिन्दू सम्मेलन,धर्म की रक्षा के लिए त्याग और संघर्ष अपरिहार्य, इतिहास देता है साक्ष्य – विजय आदित्य सिंह जूदेव

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जशपुर।जिले के जोकरी मंडल अंतर्गत ग्राम लोधमा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन धार्मिक चेतना, सांस्कृतिक अस्मिता और हिन्दू एकता का सशक्त प्रतीक बनकर सामने आया। सम्मेलन में सैकड़ों की संख्या में धर्मप्रेमी भाई-बहन, माताएं, बुजुर्ग एवं युवा शामिल हुए। पूरे आयोजन स्थल पर भगवा चेतना, संस्कृति संरक्षण और राष्ट्रभक्ति का वातावरण स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ।

इस विशाल आयोजन के मुख्य वक्ता कवर्धा से पधारे संघ पदाधिकारी चंद्रशेखर वर्मा रहे, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में बजरंग दल के जिलाध्यक्ष विजय आदित्य सिंह जूदेव उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला संघ संचालक राजीव रत्न नंदे ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में माटीकला बोर्ड के अध्यक्ष  शंभूनाथ चक्रवर्ती, सरपंच सीतामुनी सहित आसपास के अनेक ग्रामों से पहुंचे धर्मप्रेमी नागरिक बड़ी संख्या में सम्मेलन में सहभागी बने।

मुख्य वक्ता चंद्रशेखर वर्मा ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि आज हिन्दू समाज को संगठित रखने की सबसे अधिक आवश्यकता है। समाज में व्याप्त विघटनकारी प्रवृत्तियों से सावधान रहते हुए अपनी संस्कृति, परंपरा और आस्था की रक्षा करना प्रत्येक सनातनी का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि स्वयं को सशक्त बनाने के साथ-साथ समाज को भी मजबूत करना होगा। धर्मांतरण और जिहाद जैसी गतिविधियों के प्रति सतर्क रहना समय की मांग है और कहीं भी अधर्म दिखाई दे तो उसका संगठित रूप से विरोध होना चाहिए।

मुख्य अतिथि विजय आदित्य सिंह जूदेव ने कहा कि धर्म की रक्षा केवल विचारों से नहीं, बल्कि त्याग और संघर्ष से होती है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि धर्म रक्षा के लिए महापुरुषों ने अपने सुखों का परित्याग किया है। उन्होंने स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने राजसी जीवन का त्याग कर गांव-गांव जाकर हिन्दू समाज को संगठित करने का कार्य किया और अपना जीवन धर्म व संस्कृति की सेवा में समर्पित कर दिया।

उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन से उदाहरण देते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने धर्म की मर्यादा के लिए राजमहल छोड़कर वनवास स्वीकार किया, असंख्य कष्ट सहे, पर कभी धर्म मार्ग से विचलित नहीं हुए। संघर्ष और त्याग से ही धर्म की प्रतिष्ठा बनी रहती है। आज आवश्यकता है कि हम सब उसी आदर्श मार्ग पर चलते हुए हिन्दू समाज की एकता को मजबूत करें।

अपने संबोधन में जूदेव ने कहा कि हिन्दू समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकजुटता में निहित है। जब समाज संगठित रहेगा, तब कोई भी शक्ति हमारी संस्कृति और आस्था को कमजोर नहीं कर सकेगी। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे धर्म, संस्कृति और राष्ट्रहित में अग्रणी भूमिका निभाते हुए सामाजिक जागरण का कार्य करें।

सम्मेलन के दौरान धर्म, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति से जुड़े नारों से वातावरण गूंजता रहा। कार्यक्रम का समापन संगठनात्मक संकल्प, सामाजिक चेतना और हिन्दू समाज को जागरूक रखने के संदेश के साथ हुआ।

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Author: The prime news

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