जशपुरनगर।। मनोरा विकासखंड मे आस्ता के नजदीकी ग्राम खड़कोना में 21 नवम्बर को कैथोलिक ईसाइयों की ऐतिहासिक ‘खड़कोना तीर्थयात्रा’ अत्यंत भक्तिभाव और धार्मिक उत्साह के वातावरण में सम्पन्न हुई। इस वर्ष तीर्थयात्रा विशेष रही, क्योंकि पूर्व पोप फ्रांसिस द्वारा वर्ष 2025 को जुबिली वर्ष घोषित किए जाने के कारण श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया।
ऐतिहासिक महत्व

खड़कोना स्थल का धार्मिक महत्व इस ऐतिहासिक तथ्य से जुड़ा है कि 21 नवम्बर 1906 को इसी स्थान पर उराँव जनजाति के 56 लोगों ने कटकाही (बरवे) कैथोलिक मिशन के बेल्जियम मिशनरी फादर भान डेर लिन्डन से बपतिस्मा ग्रहण कर ईसाई धर्म अपनाया था। इसके बाद छोटानागपुर के टोंगो व कुरडेग के मिशनरियों द्वारा जशपुर रियासत के अन्य क्षेत्रों में भी उराँव समुदाय के लोगों ने बपतिस्मा ग्रहण किया।
बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
कार्यक्रम के लिए समिति द्वारा लगभग एक माह से तैयारियाँ की गई थीं। 21 नवम्बर की सुबह से ही बस, कार, बाइक और अन्य वाहनों से श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया। जशपुर जिले के अलावा रायगढ़, सरगुजा, बलरामपुर, झारखंड और ओडिशा से भी बड़ी संख्या में तीर्थयात्री शामिल हुए।
अनुमानतः लगभग 25 हजार श्रद्धालुओं ने तीर्थयात्रा में भाग लिया, जिनमें लगभग 500 नन और 200 प्रीस्ट शामिल थे।
पूरे दिन चला धार्मिक कार्यक्रम
सुबह 8 बजे प्रार्थना और कन्फेशन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके पश्चात् धर्म के लिए शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। 9 बजे रोजरी प्रार्थना जुलूस निकाला गया। इसके बाद 10 बजे समारोही पवित्र मिस्सा अत्यंत भक्तिपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुई।
पवित्र मिस्सा के मुख्य अनुष्ठाता पूर्णिया (बिहार) दायसिस के बिशप फासिस तिर्की थे, जबकि सह-अनुष्ठाता जशपुर दायसिस के बिशप एम्मानुएल केरकेट्टा और घाघरा डीनरी के डीन फादर यूजीन नगेसिया रहे।
गीत-संगीत का संचालन संत अन्ना कॉन्वेंट घाघरा की टीम ने किया। अम्बाकोना, ओरडीह, अजधा, घाघरा, घोलेंग और जरिया पारिश के श्रद्धालुओं ने पूरे दिन विभिन्न भागों की अगुवाई की।
सुरक्षा व्यवस्था और आयोजन
कार्यक्रम स्थल पर प्रशासन द्वारा सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था की गई थी। तीर्थयात्रा को सफल बनाने में आयोजन समिति, अजधा पल्ली के फादर अनसेल्म कुजूर, फादर यूजीन नगेसिया, जशपुर दायसिस कैथोलिक सभा के अध्यक्ष अभिनंद खलखो, ईसाई आदिवासी महासभा के जिलाध्यक्ष वाल्टर कुजूर, हैप्पी कमल कुजूर सहित अनेक लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।






