दुर्ग। अपराध अनुसंधान को और अधिक सशक्त बनाने तथा घटनास्थल से साक्ष्य संकलन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी देने के उद्देश्य से दिनांक 19 जुलाई 2025 को महात्मा गांधी कला मंदिर, सिविक सेंटर, सेक्टर-6, भिलाई में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।
यह कार्यशाला सीन ऑफ क्राइम में फिंगरप्रिंट एवं फोटोग्राफी के महत्व पर केंद्रित रही, जिसमें पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया।
एसएसपी विजय अग्रवाल ने कहा – “घटनास्थल झूठ नहीं बोलता”
कार्यशाला का नेतृत्व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग श्री विजय अग्रवाल (भा.पु.से.) ने किया। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान कहा, “घटनास्थल झूठ नहीं बोलता, साक्ष्य ही सबसे बड़ा गवाह होता है। इन साक्ष्यों को वैज्ञानिक ढंग से एकत्र करने के लिए फोटोग्राफी और फिंगरप्रिंट तकनीक का समुचित उपयोग जरूरी है।”
उन्होंने बताया कि हर थाने में फिंगरप्रिंट उठाने की किट उपलब्ध है और थानों में 3-4 कर्मचारियों को इस तकनीक में दक्ष बनाना आवश्यक है। इसके लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण (प्रैक्टिकल) कराया जाना चाहिए।
फिंगरप्रिंट व फोटोग्राफी एक्सपर्ट्स ने दी तकनीकी जानकारी
प्रशिक्षण में राकेश नरवरे, फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट रायपुर/दुर्ग संभाग और मोहम्मद वसीम, फोटोग्राफर, पुलिस मुख्यालय ने भी भाग लिया।
श्री नरवरे ने बताया कि अपराध स्थल को कैसे सुरक्षित रखा जाता है और फिंगरप्रिंट को किस प्रकार वैज्ञानिक ढंग से साक्ष्य के रूप में सुरक्षित किया जाता है।
उन्होंने बताया कि फिंगरप्रिंट तीन प्रकार के होते हैं –
1. विज़िबल (Visible) – जो सामान्य आंखों से दिखाई देते हैं,
2. इनविज़िबल (Invisible) – जो केवल विशेष उपकरण से दिखते हैं,
3. मोल्डेड (Molded) – जो कच्चे पेंट या मिट्टी जैसी सतह पर उभरते हैं।
अनेक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्री अभिषेक झा, सीएसपी भिलाई नगर श्री सत्य प्रकाश तिवारी, उप पुलिस अधीक्षक (लाइन) श्री चंद्र प्रकाश तिवारी, रक्षित निरीक्षक श्री नीलकंठ वर्मा सहित दुर्ग पुलिस के अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यशाला में अधिकारियों ने मौके पर उपस्थित रहकर प्रशिक्षण प्राप्त किया और फील्ड में इन तकनीकों को प्रभावी ढंग से अपनाने का संकल्प लिया।






