जशपुर, राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का जशपुर जिले के आगडीह हवाई पट्टी पर आगमन आज जिले के लिए ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण के रूप में दर्ज हुआ। राष्ट्रपति के आगमन पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका, झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार तथा मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन विष्णुदेव साय ने उनका आत्मीय एवं भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर संपूर्ण प्रशासनिक एवं जनप्रतिनिधि वर्ग की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।
राष्ट्रपति के स्वागत अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, सांसद श्री चिंतामणि महाराज, सांसद राधेश्याम राठिया, सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, विधायक पुरंदर मिश्रा, सरगुजा संभाग आयुक्त नरेंद्र दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास तथा एसएसपी शशि मोहन सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। आगडीह हवाई पट्टी पर राष्ट्रपति का स्वागत पारंपरिक आत्मीयता और सम्मान के साथ किया गया।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष इस अवसर पर जशक्राफ्ट ब्रांड के अंतर्गत तैयार किए गए स्थानीय हस्तशिल्प उत्पादों को पारंपरिक उपहार के रूप में भेंट किया गया। ये उत्पाद जशपुर जिले के स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों—विशेष रूप से बाँस एवं सवई घास—से निर्मित थे, जो जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक कला का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। राष्ट्रपति ने इन हस्तनिर्मित कलाकृतियों को देखकर विशेष प्रसन्नता व्यक्त की और स्थानीय कारीगरों की रचनात्मकता, कौशल तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की मुक्तकंठ से सराहना की।
राष्ट्रपति ने कहा कि जशक्राफ्ट के माध्यम से तैयार किए गए ये उत्पाद न केवल पारंपरिक जनजातीय कला का संरक्षण कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय संसाधनों के सतत उपयोग का भी प्रेरक उदाहरण हैं। यह पहल जशपुर जिले की समृद्ध जनजातीय विरासत, स्थानीय कारीगरों की मेहनत और जशपुर वनमंडल द्वारा किए जा रहे नवाचारपूर्ण प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
जशपुर वनमंडल द्वारा किए जा रहे नवाचारों के तहत ग्राम कोटानपानी की संयुक्त वन प्रबंधन समिति को चक्रीय निधि से वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इस सहायता से ग्रामीण महिला कारीगरों को स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त हुए हैं। समिति के सदस्य बाँस एवं सवई घास जैसे स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए आकर्षक, टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल हस्तशिल्प उत्पादों का निर्माण कर रहे हैं।
जशक्राफ्ट ब्रांड के अंतर्गत तैयार किए जा रहे उत्पादों में झुमके, माला, टोपी सहित अन्य पारंपरिक आभूषण एवं दैनिक उपयोग की सामग्री शामिल हैं। ये सभी उत्पाद स्थानीय कारीगरों की पीढ़ियों से संचित पारंपरिक कला, कौशल और जनजातीय ज्ञान का सशक्त प्रतिबिंब हैं। उत्पाद निर्माण की पूरी प्रक्रिया में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग के सिद्धांतों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
इस पहल के माध्यम से न केवल स्थानीय कारीगरों और ग्रामीण परिवारों का आर्थिक सशक्तिकरण हो रहा है, बल्कि जशपुर क्षेत्र की समृद्ध जनजातीय हस्तकला को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में भी सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। इससे स्थानीय उत्पादों के लिए नए बाजार खुलेंगे, रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
जशपुर वनमंडल की ओर से यह विश्वास व्यक्त किया गया कि भविष्य में भी इस प्रकार की नवाचारपूर्ण और जनकल्याणकारी पहलें निरंतर जारी रहेंगी, जिससे पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का संवर्धन और सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित की जा







